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भोपाल में साध्वी प्रज्ञा या दिग्विजय? यहां देखें MP की हर सीट का सबसे सटीक Exit Poll

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मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की भले ही हार हुई, मगर लोकसभा चुनाव में फीलगुड होने के संकेत हैं. एग्जिट पोल के मुताबिक दोनों राज्यों में बीजेपी जीतती दिख रही है.

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की गुना संसदीय सीट भी फंसी है, इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी से कांटे की टक्कर है.

इस रिपोर्ट में आप, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सभी सीटों का हाल जान सकेंगे.एग्जिट पोल में पहले ही आप जान चुके हैं कि मध्य प्रदेश में बीजेपी 26-28 सीट प्राप्त करेगी, वहीं वोट शेयर 57 प्रतिशत रहेगा, जबकि कांग्रेस(यूपीए) एक से तीन सीट हासिल कर सकती है, उसे 33 प्रतिशत वोट शेयर मिलेगा.

जबकि छत्तीसगढ़ के एग्जिट पोल में बीजेपी(एनडीए) को सात से आठ सीट मिलने का अनुमान है. वहीं 47 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है.

इसी तरह कांग्रेस(यूपीए) को तीन से चार सीट और 40 प्रतिशत वोट शेयर मिलेगा. जबकि अन्य को शून्य सीट और 13 प्रतिशत तक वोट मिलने की संभावना है.

एमपी की सीटों का हाल

आज तक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में अनुमान है कि मुरैना और गुना सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच कठिन लड़ाई है.

इस प्रकार देखें तो कांग्रेस नेता ज्योत‍िराद‍ित्य स‍िंधिया की गुना संसदीय सीट और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की मुरैना सीट फंसी हुई नजर आ रही है.

उनके मुकाबले बीजेपी ने डॉक्टर केपी यादव को खड़ा किया है, जो पहले कांग्रेस में थे और सिंधिया के राजदार माने जाते हैं.वहीं राज्य में छिंदवाड़ा एकमात्र सीट है,जिस पर कांग्रेस की लोकप्रियता कहीं ज्यादा है.

यह सीट कांग्रेस के खाते में जाने के संकेत हैं. एग्जिट पोल के मुताबिक, राज्य की भिंड, ग्वालियर, सागर, टीकमगढ़, दामोह, खजुराहो, सतना, रीवा, सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, होशंगाबाद, विदिशा, भोपाल, राजगढ़, देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन , खंडवा और बैतूल लोकसभा सीट पर बीजेपी मजबूत है.

छत्तीसगढ़ में कौन-कहां लोकप्रिय?

आज तक और आज तक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक, रायगढ़ सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होगी. वहीं बस्तर, कांकेर और कोरबा सीट पर कांग्रेस लोकप्रिय है,

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जानिए इस ख़ास हेलिकॉप्टर से ही क्यों रैलियों में जाते हैं PM नरेंद्र मोदी …. वजह जानकर शॉक रह जायेंगे

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जानिए इस ख़ास हेलिकॉप्टर से ही क्यों रैलियों में जाते हैं PM नरेंद्र मोदी

लोकसभा चुनाव् 2019 के तहत आजकल चुनावी रैलियों का दौर चल रहा है, ऐसे में ज्यादातर बड़े नेता हेलिकॉप्टर से रैली स्थल पर पहुंचते हैं

लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है PM मोदी जब भी चुनावी रैली में जाते हैं तो वो एक ख़ास हेलिकॉप्टर से वहां पहुंचते हैं जो आकार में बेहद विशाल होता है और इसमें दर्जन भर लोगों के बैठने के लिए जगह भी होती है।

आपको बता दें कि PM मोदी हर बार Mil Mi-17 हेलिकॉप्टर से ही चुनावी रैलियों में पहुंचते हैं। यह एक सोवियत रशियन हेलिकॉप्टर है। यह एक मीडियम ट्विन टर्बाइन ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर है जो काफी भार उठा सकता है।

हेलिकॉप्टर MI17 लेटेस्ट तकनीक से लैस हेलिकॉप्टर है। यह हेलिकॉप्टर इतना मजबूत होता है कि बन्दूक की गोलियों से हुए हमले को भी झेल ले जाए।

यह हेलिकॉप्टर बेहद ही सुरक्षित होने के साथ मजबूत भी होता है। वायुसेना के कई जरूरी अभियानों में इस हेलिकॉप्टर की मदद ली जाती है जिनमें बचाव कार्य भी शामिल है।

Mi-17 एक मिलिट्री ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर है। इस हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल सेना के जवानों को एक स्थान से दुसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है।

इसकी मजबूती और बेजोड़ ताकत की वजह से ही PM मोदी भी इस हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह बेहद ही सुरक्षित होता है और किसी बख्तरबंद कवच की तरह काम करता है।

ये है खासियत

 

इस हेलिकॉप्टर की टॉप स्पीड 250 किमी/घंटा है। यह 6000 मीटर की अधिकतम ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है। एक बार फ्यूल टैंक भरने के बाद ये हेलिकॉप्टर आसानी से 580 किमी. की दूरी तय करता है।

यह हेलिकॉप्टर अधिकतम 13,000 किलो के वजन के साथ उड़ान भर सकता है। इससे करीब 36 आर्म्ड जवानों को ले जाया जा सकता है। इस हेलिकॉप्टर में कई घातक मिसाइल भी लगाईं जा सकती हैं जिनका इस्तेमाल जंग के दौरान किया जा सकता है।

26/11 के कमांडो ऑपरेशन में भी हुआ था इस्तेमाल

 

आपको बता दें कि 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले में इसी हेलिकॉप्टर की मदद से एनएसजी कमांडो को कोलाबा में आतंकियों से मुकाबला करने के लिए उतारा गया था।

ख़ास बात यह है कि यह हेलिकॉप्टर किसी भी परिस्थित में काम के लिए तैयार रहता है और वो भी बेहद सुरक्षित तरीके से और यही वजह है कि पीएम मोदी को रैली स्थल में लाने के लिए इस हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया जाता है।

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IAS इंटरव्यू में पूछा सवाल – एसपीजी सुरक्षा कब औऱ किसको मिलती हैं …….. जाने इसका सही जवाब

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विशेष सुरक्षा दल (SPG) देश की सबसे पेशेवर एवं आधुनिकतम सुरक्षा बलों में से एक है. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है. SPG भारत में किसको सुरक्षा प्रदान करती है

और कितने समय के लिए, इसका क्या इतिहास है, इसको क्यों बनाया गया, SPG फोर्स कैसे काम करती है इत्यादि के बारें में इस लेख के माध्यम से अध्ययन करेंगे.

SPG देश के सबसे जांबाज सिपाही कहे जाते हैं. जब ये देश के पीएम या भारत दौरे पर आए किसी अति विशिष्ट अतिथि की सुरक्षा देखते हैं तो उस वक्त ये जहन में आता है कि आखिर ये किसके बने होते हैं, इनकी ट्रेनिंग कैसी होती है?

इत्यादि. विशेष सुरक्षा दल (Special Protection Group- SPG), 2 जून, 1988 में भारत की संसद के एक अधिनियम द्वारा बनाया गया था.

इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है. यह केंद्र का विशेष सुरक्षाबलों में से एक है. क्या आप जानते है कि SPG का मुकाबला अमेरिकन राष्ट्रपति की सुरक्षा करने वाली ‘US Secret Service’ से होता है.

इन जवानों का चयन पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स (BSF, CISF, ITBP, CRPF) से किया जाता है. यह बल गृह मंत्रालय के अधीन है. SPG देश की सबसे पेशेवर एवं आधुनिकतम सुरक्षा बलों में से एक है.

ये एक फुली ऑटोमेटिक गन FNF-2000 असॉल्ट राइफल से लैस होते हैं. कमांडोज के पास ग्लोक 17 नाम की एक पिस्टल भी होती है. कमांडो अपनी सेफ्टी के लिए एक लाइट वेट बुलेटप्रूफ जैकेट भी पहनते हैं

और साथी कमांडो से बात करने के लिए कान में लगे ईयर प्लग या फिर वॉकी-टॉकी का सहारा लेते हैं. यहां तक की इनके जूते भी काफी अलग होते है जो किसी भी जमीन पर फिसलते नहीं हैं.

साथ ही इनके हाथों में खास तरह के दस्ताने होते है जो कमांडो को चोट लगने से बचाते हैं. परन्तु सवाल यह उठता है कि आखिर यह सुरक्षा भारत में किसको दी जाती है और कितने समय तक दी जाती है.

आइये इस लेख के माध्यम से यह जानने की कोशिश करते हैं.’

भारत में SPG सुरक्षा किसको दी जाती है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा, SPG सात अन्य लोगों – पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उनकी पत्नी गुरशरण कौर, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी,

उनकी दत्तक बेटी नमिता भट्टाचार्य, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके दो बच्चे राहुल और प्रियंका गांधी की सुरक्षा करती है.

इसके जवान पीएम को 24 घंटे एक विशेष सुरक्षा घेरा प्रदान करते हैं. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, देश के अन्य हिस्से, तथा विदेशी दौरों पर, हर स्थान पर, हर क्षण, प्रधानमंत्री की अंगरक्षा एवं किसी भी प्रकार के हमले से उनकी सुरक्षा, SPG की ज़िम्मेदारी होती है.

इसके अलावा SPG, प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री कार्यालय तथा हर वह स्थान जहाँ प्रधानमंत्री रहते हैं, उनकी सुरक्षा करती है.

SPG फोर्स कैसे काम करती है

SPG के जवानों को विश्व स्थर की ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. ये वही ट्रेनिंग है जो युनाइटेड स्टेट सीक्रेट सर्विस एजेंट्स को दी जाती है. ‘इंटेलिजेंस ऐंड टूर्स’ धमकी और खतरे को भांपता है,

इंटरनल इंटेलिजेंस पर नजर रखता है और साथ में यात्राओं का जिम्मा संभालता है. SPG के जवान हाई ग्रेड बुलेटप्रूफ वेस्ट पहने होते हैं, जो लेवल-3 केवलर की होती है.

इसका वजन 2.2 किग्रा होता है और यह 10 मीटर दूर से एके 47 से चलाई गई 7.62 कैलिबर की गोली को भी झेल सकती है.

SPG के जवानों के पास FNF-2000 असॉल्ट राइफल और ग्लॉक 17 पिस्टल होती हैं. ये जवान सुरक्षा तंत्र के जरिए कम्युनिकेशन डिवाइसेस से जुड़े होते हैं.

हमले की सूरत में सेकंड कार्डन की जिम्मेदारी होती है कि वह पीएम के चारों ओर घेरा बनाकर खड़े जवानों को सिक्यॉरिटी कवर दें ताकि प्रधानमंत्री को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके.

क्या आप जानते है कि यह हमलावर फोर्स नहीं बल्कि रक्षात्मक फोर्स है. यह कमांडोज चश्मा भी पहनते हैं, जो उनकी आखों को हमले से बचाते हैं और किसी भी प्रकार का डिस्ट्रैक्शन नहीं होने देता हैं.

आपको बता दे की SPG के जवानों के साथ पीएम के काफिले में एक दर्जन गाड़ियां होती हैं, जिसमें बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज की सिडान, 6 बीएमडब्ल्यू एक्स3 और एक मर्सिडीज बेंज होती है. इसके अलावा मर्सिडीज बेंज ऐंम्बुलेंस, टाटा

सफारी जैमर भी इस काफिले में शामिल होते है.
SPG का गठन कैसे हुआ, इसके पीछे का इतिहास

1981 से पहले, भारत के प्रधानमंत्री के आवास पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा पुलिस उपायुक्त (DCP) के प्रभारी दिल्ली पुलिस के विशेष सुरक्षा जिले की जिम्मेदारी हुआ करती थी.

अक्टूबर 1981 में, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) द्वारा, नई दिल्ली में और नई दिल्ली के बाहर प्रधानमंत्री को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स (STF) का गठन किया गया.

अक्टूबर 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, समीक्षा सचिवों की एक समिति ने तय किया की प्रधानमंत्री को एक विशेष समूह के अधीन निर्दिष्ट अधिकारी, STF और प्रत्यक्ष नियंत्रण के तहत नई दिल्ली और बाहर दोनों जगह सौंप दिया जाए.

इस पर 18 फरवरी 1985 को, गृह मंत्रालय ने बीरबल नाथ समिति की स्थापना की और मार्च 1985 में, बीरबल नाथ समिति ने एक स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट (SPU) के गठन के लिए सिफारिश को प्रस्तुत किया.

30 मार्च 1985, को भारत के राष्ट्रपति ने कैबिनेट सचिवालय के तहत इस यूनिट के लिए 819 पदों का निर्माण किया. SPU को स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप का नाम दिया गया और पुलिस महानिरीक्षक के पद को निदेशक के रूप में पुनः नामित किया गया था.

जानें प्रधानमंत्री के बॉडीगार्ड काला चश्मा क्यों पहनते है

SPG, 8 अप्रैल,1985 को अस्तित्व में आया, जब इंटेलिजेंस ब्यूरो के तत्कालीन संयुक्त निदेशक (VIP Security) एस. सुब्रमण्यम ने पद को ग्रहण किया.

स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप ने अप्रैल 1985 से 2 जून 1988 तक एक सुरक्षा समूह के तौर पर कार्यकारी आदेश की शक्ति के तौर पर तीन साल के लिए कानून के बिना काम किया था.

ब्लू बुक में इसके प्रावधान निहित है, जिसमें प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश भी दिए गए है, की कैसे निकटतम सुरक्षा को इस नई अवधारणा के साथ सामंजस्यपूर्ण रूप से मिश्रित होना चाहिए.

मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद, 1991 में SPG अधिनियम को पूर्व प्रधानमंत्री और उनके तत्काल परिवारों को 10 वर्ष की अवधि के लिए सुरक्षा प्रदान करने के लिए संशोधित किया गया था.

अत: फिर से 2002 में, SPG अधिनियम में एक और संशोधन किया गया जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री को प्रदान की गई सुरक्षा की अवधि को कम करके एक वर्ष कर दिया गया था

और यह प्रावधान है कि इस अवधि को खतरे के स्तर के आधार पर बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके परिवार के मामले में एक अपवाद बनाया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री के पैमाने पर लगातार एसपीजी संरक्षण दिया जा रहा हैं.

SPG का प्रमुख कौन होता है?

SPG का प्रमुख कौन होता है?

Hindu nationalist Narendra Modi (C), prime ministerial candidate for India’s main opposition Bharatiya Janata Party (BJP) and Gujarat’s chief minister, is surrounded by his security personnel as he arrives to attend a public meeting at Somnath in the western Indian state of Gujarat February 1, 2014. REUTERS/Amit Dave (INDIA – Tags: POLITICS)

SPG का पद तीन साल के निश्चित कार्यकाल के लिए बनाया गया है. SPG फोर्स कैबिनेट सचिवालय के अन्तर्गत काम करता है और रक्षा सचिव इसका प्रमुख होता है.

इस लेख के माध्यम से यह ज्ञात होता हैं कि SPG क्या होती है, कैसे काम करती है, भारत में किनको यह सुरक्षा दी जाती हैं आदि

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ये है देश के सबसे बड़े नेता जो जमानत पर रहकर लड़ रहे है चुनाव …… नाम जानकर चौक जायेंगे

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भोपाल लोकसभा सीट के लिए बीजेपी द्वारा प्रज्ञा सिंह ठाकुर की उम्मीदवारी को लेकर पिछले सप्ताह काफी हंगामा हुआ था। मालेगांव विस्फोट मामले में वह जमानत पर है।

पीड़िता में से एक के पिता ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए उनके खिलाफ अदालत का रुख किया।

हालांकि, एक विशेष NIA अदालत ने उनके खिलाफ दायर आवेदन को खारिज कर दिया। यहां ऐसे ही जमानत पर रहते हुए लोकसभा चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों पर नजर डालते है।

प्रज्ञा सिंह ठाकुर (भाजपा) 

मालेगांव ब्लास्ट केस

लोकसभा सीट : भोपाल (मध्य प्रदेश)

मुकाबले में: दिग्विजय सिंह (कांग्रेस)

सोनिया गांधी (नेशनल हेराल्ड केस )

लोकसभा सीट: रायबरेली (उत्तर प्रदेश)

मुकाबले में: दिनेश प्रताप सिंह (भाजपा)

राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस

लोकसभा सीट: अमेठी (उत्तर प्रदेश), वायनाड

मुकाबले में: स्मृति ईरानी (भाजपा)

शशि थरूर (कांग्रेस)

सुनंदा पुष्कर केस

लोकसभा चुनाव: तिरुवनन्तपुरम (केरल)

मुकाबले में: कुमानम राजशेखरन (भाजपा), सी दिवाकरन (सीपीआई)

पप्पू यादव (जन अधिकार पार्टी)

पुलिस के साथ दुर्व्यवहार, आचार संहिता का उल्लंघन

लोकसभा सीट: माधेपुरा (बिहार)

मुकाबले में: शरद यादव (आरजेडी), दिनेश चंद्र यादव (जेडीयू)

गिरिराज सिंह (भाजपा)

हेट स्पीच केस

लोकसभा सीट: बेगुसराय (बिहार)

मुकाबले में: कन्हैया कुमार (सीपीआई)

कन्हैया कुमार (सीपीआई)

जेएनयू राजद्रोह मामला

लोकसभा सीट: बेगुसराय (बिहार)

मुकाबले में: गिरिराज सिंह (भाजपा), तनवीर हसन (आरजेडी)

कार्ति पी चिदंबरम (कांग्रेस)

आईएनएक्स मीडिया स्कैम

लोकसभा सीट: शिवगंगा

मुकाबले में: एच राजा (भाजपा)

संजीव कुमार बालियान

2013 मुजफ्फरनगर दंगे

लोकसभा सीट: मुजफ्फरनगर

मुकाबले में: अजित सिंह (आरएलडी-महागठबंधन)

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अमित शाह बनाम राहुल गांधी : – जानिए कौन है अपनी पार्टी का दमदार अध्यक्ष

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मिशन-2019 के तहत लोकसभा चुनाव-2019 अब नजदीक है। यह चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई के बीच होना है।

ऐसे में सभी दलों के उम्मीदवार अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। आज हम आपको बताएंगे कि एक अध्यक्ष के तौर पर अमित शाह और राहुल गांधी में से किसका परफॉर्मेंस जबरदस्त है?

किसको मिली कितनी जीत और कितनी हार

अध्यक्ष बनने के बाद 3 साल के अंदर अमित शाह की अध्यक्षता वाली बीजेपी को 3 चुनावी हार का सामना करना पड़ा। साथ ही बीजेपी ने 11 जीत भी हासिल की।

वहीं अध्यक्ष बनने के बाद 5 साल के अंदर राहुल गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने कुल 9 चुनाव जीते और 27 हारे। ऐसे में चुनावी परफॉर्मेंस के मामले में अमित शाह, राहुल गांधी से ज्यादा दमदार अध्यक्ष बनने में सफल हुए हैं।

दोनों नेताओं की ताकत और कमजोरी

परिवार की लीगेसी राहुल गांधी की बड़ी ताकत है, साथ ही नए विचारों की कमी उनकी कमजोरी है। दूसरी तरफ अमित शाह की ताकत ये है कि वह पीएम नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद हैं

और उनकी पार्टी पर मजबूत पकड़ है। लेकिन उनकी एक बड़ी कमजोरी यह है कि वह सख्त मिजाज वाले हैं, जिससे लोग उन्हें कई बार नापसंद भी करते हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो राजनीतिक संघर्ष में अमित शाह एक अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी से काफी आगे हैं। हमें इस पर अपनी राय जरूर दीजिये। साथ ही हमें फॉलो कीजिये।

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मतदान करने यूरोप से UP पहुंची ये महिला, कहा ……. ये नेता बनना चाहिए देश का प्रधानमंत्री

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लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश की 13 सीटों पर मतदान सुबह 7 बजे से जारी है। लोगों में मतदान को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

वहीं इसी बीच मऊ से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने देश के प्रत्येक व्यक्ति को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए जागरूक किया है।

दरअसल, अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने एक महिला यूरोप से चलकर मऊ पहुंची।

मऊ की घोसी लोकसभा सीट पर मतदान करने के बाद प्रिया ने बताया कि मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए यूरोप से चलकर आई हैं।

प्रिया का कहना है कि जिन हाथों ने भारत को मजबूत किया है, उन हाथों को हमें मजबूत करना चाहिए।

आज मोदी के कारण भारत को पूरे विश्व में सम्मान मिला है और इस प्रतिष्ठा में बढ़ोत्तरी हो इसके लिए हर किसी को बढ़-चढ़कर योगदान करना चाहिए।

बता दें कि, वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर उतरने के बाद प्रिया सिंह अपने भाई उज्जवल सिंह के साथ कार से मऊ आई। प्रिया स्वीडन में अपने पति विजय विक्रम सिंह के साथ रहती हैं, जो पेशे से साॅफ्टवेयर इंजीनियर हैं।

उल्लेखनीय है कि आखिरी चरण में प्रदेश की वाराणसी, महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर और राबर्ट्सगंज लोकसभा सीटों पर वोटिंग हो रही है। क

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उर्मिला से जया तक, क्या हार जाएंगे ये 13 चेहरे? देखें सभी बड़े नेताओ का EXIT POLL

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आजतक और एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल आ गया है. इस एग्जिट पोल में एनडीए को 339 से 365 सीटें मिलती दिख रही है,

उर्मिला से जया तक, क्या हार जाएंगे ये 13 चेहरे? देखें EXIT POLL

उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार डिंपल यादव को लेकर एग्जिट पोल में अच्छी खबर नहीं है. इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार के जीतने की संभावना जताई जा रही है.


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मैनपुरी लोकसभा सीट पर सालों से सपा की मजबूत पकड़ रही है, लेकिन आजतक के एग्जिट पोल में सपा के संरक्षक मुलायम सिंह की मैनपुरी सीट फंसी हुई नजर आ रही है.

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फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर हार सकते हैं, एग्जिट पोल में यहां बीजेपी की पकड़ दिखाई जा रही है. हालांकि यह केवल अनुमान है.


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आजतक- एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल (Exit Poll) में सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से बीजेपी गठबंधन को 62-68 सीटें मिलती हुई नजर आ रही हैं.

दिलचस्प बात यह है कि एग्जिट पोल में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अमेठी सीट भी फंसने का अनुमान लगाया गया है.

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एग्जिट पोल में कांग्रेस-आरजेडी के कई दिग्गजों का चुनाव जीतना आसान नहीं है. पटना साहिब से कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा की सीट खतरे में दिख रही है, एग्जिट पोल में इस सीट पर बीजेपी की पकड़ बताई जा रही है.

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पाटलिपुत्र से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं लालू यादव की बेटी मीसा भारती की राह आसान नहीं है. एग्जिट पोल में यह सीट बीजेपी के खाते में जाती दिख रही है.

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मुंबई उत्तर लोकसभा सीट से कांग्रेस ने अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर को उतारा है. एग्जिट पोल में इनकी राह मुश्किल नजर आ रही है. यहां से बीजेपी उम्मीदवार के जीतने का अनुमान है.

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एग्जिट पोल में ईस्ट दिल्ली संसदीय सीट पर आम आदमी पार्टी की आतिशी पिछड़ती दिख रही हैं. यहां से बीजेपी के टिकट पर राजनीति में एंट्री कर रहे क्रिकेटर गौतम गंभीर भी चुनाव जीत सकते हैं.

उर्मिला से जया तक, क्या हार जाएंगे ये 13 चेहरे? देखें EXIT POLL

कर्नाटक की तुमकुर लोकसभा सीट से पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा चुनावी मैदान में हैं. आजतक के एग्जिट पोल में देवगौड़ा की राह आसान नहीं दिखाई जा रही है. एग्जिट पोल के आंकड़े बीजेपी के जीएस बसवाराज के पक्ष जाता दिख रहा है.

उर्मिला से जया तक, क्या हार जाएंगे ये 13 चेहरे? देखें EXIT POLL

आजतक एक्सिस माइ इंडिया के एग्जिट पोल में भोपाल से कांग्रेस के लिए अच्छी खबर नहीं है. यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह पिछड़ते नजर आ रहे हैं. बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा का यहां से बाजी मारने का अनुमान है.

उर्मिला से जया तक, क्या हार जाएंगे ये 13 चेहरे? देखें EXIT POLL

इस चुनाव में बेगूसराय लोकसभा सीट पर देशभर की निगाहें हैं. एग्जिट पोल में यहां से बीजेपी के गिरिराज सिंह के जीतने की संभावना जताई गई है. सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ रहे कन्हैया कुमार चुनाव में पिछड़ते दिख रहे हैं.

गुना लोकसभा सीट से कांग्रेस ने एक बार फिर से ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने कृष्ण पाल सिंह उर्फ केपी यादव पर दांव लगाया है. EXIT POLL की माने तो इस बार बीजेपी के केपी यादव से ज्योतिरादित्य सिंधिया को कड़ी टक्कर मिल रही है.

उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर जया प्रदा मैदान में हैं. जया प्रदा का मुकाबला सपा के आजम खान से है. एग्जिट पोल की मानें तो यहां से अभिनेत्री जया प्रदा पिछड़ रही हैं.

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भोपाल में साध्वी प्रज्ञा या दिग्विजय? यहां देखें MP की हर सीट का सबसे सटीक Exit Poll

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मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की भले ही हार हुई, मगर लोकसभा चुनाव में फीलगुड होने के संकेत हैं. एग्जिट पोल के मुताबिक दोनों राज्यों में बीजेपी जीतती दिख रही है.

मध्य प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की गुना संसदीय सीट भी फंसी है, इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी से कांटे की टक्कर है.

इस रिपोर्ट में आप, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सभी सीटों का हाल जान सकेंगे.एग्जिट पोल में पहले ही आप जान चुके हैं कि मध्य प्रदेश में बीजेपी 26-28 सीट प्राप्त करेगी, वहीं वोट शेयर 57 प्रतिशत रहेगा, जबकि कांग्रेस(यूपीए) एक से तीन सीट हासिल कर सकती है, उसे 33 प्रतिशत वोट शेयर मिलेगा.

जबकि छत्तीसगढ़ के एग्जिट पोल में बीजेपी(एनडीए) को सात से आठ सीट मिलने का अनुमान है. वहीं 47 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है.

इसी तरह कांग्रेस(यूपीए) को तीन से चार सीट और 40 प्रतिशत वोट शेयर मिलेगा. जबकि अन्य को शून्य सीट और 13 प्रतिशत तक वोट मिलने की संभावना है.

एमपी की सीटों का हाल

आज तक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में अनुमान है कि मुरैना और गुना सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच कठिन लड़ाई है.

इस प्रकार देखें तो कांग्रेस नेता ज्योत‍िराद‍ित्य स‍िंधिया की गुना संसदीय सीट और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की मुरैना सीट फंसी हुई नजर आ रही है.

उनके मुकाबले बीजेपी ने डॉक्टर केपी यादव को खड़ा किया है, जो पहले कांग्रेस में थे और सिंधिया के राजदार माने जाते हैं.वहीं राज्य में छिंदवाड़ा एकमात्र सीट है,जिस पर कांग्रेस की लोकप्रियता कहीं ज्यादा है.

यह सीट कांग्रेस के खाते में जाने के संकेत हैं. एग्जिट पोल के मुताबिक, राज्य की भिंड, ग्वालियर, सागर, टीकमगढ़, दामोह, खजुराहो, सतना, रीवा, सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, होशंगाबाद, विदिशा, भोपाल, राजगढ़, देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन , खंडवा और बैतूल लोकसभा सीट पर बीजेपी मजबूत है.

छत्तीसगढ़ में कौन-कहां लोकप्रिय?

आज तक और आज तक-एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल के मुताबिक, रायगढ़ सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होगी. वहीं बस्तर, कांकेर और कोरबा सीट पर कांग्रेस लोकप्रिय है,

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पढ़िए श्री नाथूराम गोडसे जी का अंतिम पत्र जो उन्हें फांसी पर लटकाये देने से पहले लिखा था

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नथूराम गोडसे

अम्बाला सेंट्रल जेल

दिनांक 12.11.1949 ई.

परम वन्दनीय माताजी व पिताजी अत्यंत विनम्रता से अंतिम प्रणाम!

आपके आशीर्वाद विद्युत् सन्देश (टेलीग्राम) से मिल गए, आपने आज अपना स्वास्थ्य और वृद्धावस्था की स्थिति में यहाँ तक न आने की मेरी विनती मान ली, इससे मुझे बड़ा संतोष हुआ है।

आपके छाया चित्र मेरे पास हैं, उनका पूजन करके ही मैं ब्रह्म्मलीन हो जाऊँगा। लौकिक व्यवहार के कारण, आपको तो इस घटना से परम दुःख होगा, इसमें कोई भी संदेह नहीं है। लेकिन मैं यह पत्र किसी दुःख के आवेग से या दुःख की चर्चा के कारण नहीं लिख रहा हूँ। आप गीता के पाठक हैं। आपने पुराणों का भी अध्ययन किया है।

भगवान् श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश किया है और उसी भगवान् ने राजसूर्य यज्ञ पर युद्ध भूमि पर नहीं, शिशुपाल जैसे एक आर्य राजा का वध अपने सुदर्शन चक्र से किया है। कौन कह सकता है कि, श्रीकृष्ण ने पाप किया?

श्रीकृष्ण ने युद्ध में और दूसरी तरह से भी अनेक अहंकारी और प्रतिष्ठित लोगों की हत्या विश्व के कल्याण हेतु की है और गीता के उपदेश में अर्जुन को अपने बन्धु-बांधवों की हत्या करने के लिए बार-बार कहकर अंत में युद्ध के लिए प्रवृत्त किया है।

पाप और पुण्य मनुष्य की कृति में नहीं, मनुष्य के मन में होता है। दुष्टों को दान देना पुण्य नहीं समझा जाता, वह अधर्म है, एक सीता देवी के कारण रामायण की कथा बन गयी, एक द्रोपदी के कारण महाभारत के इतिहास का निर्माण हुआ।

सहस्त्रावधि स्त्रियों का शील-भ्रष्ट हो रहा था और करने वाले राक्षसों कि हर तरह से सहायता करने के यत्न कर रहे थे। ऐसी अवस्था में अपने प्राणों के भय से या जन- निंदा के डर से कुछ भी नहीं करना यह मुझसे सहन नहीं हुआ।

सहस्त्रावधि रमणियों के आशीर्वाद मेरे भी पीछे हैं, मेरा बलिदान मेरी प्रिय मातृभूमि के चरणों पर है। अपना एक कुटुंब अथवा कुछ कुटुम्बियों की दृष्टि में हानि अवश्य हो गयी है लेकिन मेरी दृष्टि के सामने छिन्न-विछिन्न मन्दिर, कटे हुए मस्तिष्कों की लाशें, बालकों की क्रूर हत्याएं, नारियों की विडंबना, हर घडी देखने में आती थी।

आततायी और अनाचारी लोगों को मिलने वाला सहारा तोडना मैंने अपना पवित्र ईशवरीय कर्तव्य समझा। मेरा मन शुद्ध, मेरी भावना अत्यत शुद्ध थी, कहने वाले लाख तरह से कहें तो भी मेरा मन एक क्षण के लिए भी अस्वस्थ नहीं हुआ। अगर संसार में कहीं स्वर्ग होगा, तो मेरा स्थान उसमे निश्चित है। उसकी प्राप्ति के वास्ते मुझे कोई विशेष प्रार्थना करने कि आवश्यकता नहीं है। अगर मोक्ष होगा तो मोक्ष की मनीषा मैं करता हूँ।

दया मांग कर, अपने जीवन की भीख माँगना मुझे ज़रा भी पसंद नहीं था और आज की सरकार को मेरा धन्यवाद कि उसने दया के रूप में मेरा वध नहीं किया, दया की भिक्षा से ज़िंदा रहना ही मैं असली मृत्यु समझता था।

मृत्यु दण्ड देने वालों में मुझे मारने की शक्ति नहीं, मेरा बलिदान मेरी मातृभूमि अत्यंत प्रेम से स्वीकार करेगी। मृत्यु मेरे सामने नहीं आई, मैं स्वयं मृत्यु के सामने खड़ा हो गया हूँ। मैं उसकी तरफ सहास्य वदन से देख रहा हूँ और वह भी मुझे एक मित्र के नाते हस्तांदोलन कर रही

है।

“आपुले मरण पाहिले म्यां डोला।

जाहला तो सोहला अनुपमेव।”

जातस्य हि ध्रवो मृत्यु, ध्रुवं जन्म मृत्युस्य च।

तस्माद परिहार्येर्थे न त्वं शोचितुमहर्सी।। (भगवद्गीता)

गीता में तो जीवन और मृत्यु की समस्या का ही विवेचन श्लोक -श्लोक में भरा हुआ है। मृत्यु में ज्ञानी मनुष्य को शोक-विहल करने की शक्ति नहीं है। मेरे शरीर का नाश होगा, परन्तु मेरी आत्मा का नहीं।

“आसिंधु-सिन्धु भारतवर्ष पूरी तरह से स्वतंत्र कराने का मेरा ध्येय-स्वप्न मेरे शरीर की मृत्यु से मरना अशक्य है।”

अधिक लिखने की कोई आवश्यकता नहीं है।

सरकार ने आपको मुझसे मिलने का अंतिम अवसर नहीं दिया। सरकार से किसी भी तरह की अपेक्षा नहीं रखते हुए, मुझे यह कहना पड़ेगा कि अपनी सरकार किस तरह से मानवता के तत्व को अपना रही है?

मेरे मित्रगण और चि. दत्ता गोविन्द, गोपाल आपको कभी भी अंतर नहीं देंगे। आपकी चि.अप्पा के साथ और बातचीत हो जायेगी, वह आपको सब वृत्त निवेदन करेगा।

जिस देश में लाखों मनुष्य हैं कि जिनके नेत्र से मेरे बलिदान के आंसू बहेंगे। वह लोग आपके दुःख में सहभागी हैं।

आप स्वयं को ईश्वर की निष्ठा के बल पर अवश्य संभालेंगे, इसमें तनिक भी संदेह नहीं।

अखंड भारत अमर रहे, वन्देमातरम!

आपके चरणों को सहस्त्रष: प्रणाम !!

आपका विनम्र

नथुराम गोडसे

अगर आप ने इस लेटर को ध्यानपूर्वक पढ़ा होगा तो इसमे उनकी भावना को आप भली भांति समझ सकते हैं कि कैसे देश प्रेम के लिए एक सच्चा देश भक्त अपने आप को कुर्बान करने से भी नहीं कतराता है।

जय हिंद, जय भारत

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साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के पास है इतनी संपत्ति, आय का स्त्रोत जानकर चौंक जाएंगे

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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की भोपाल संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मंगलवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया.

प्रज्ञा ने अपने हलफनामे में कुल 4,44,224 रुपये की संपत्ति की घोषणा की है. जिसमें 90,000 रुपये की नकदी और भोपाल स्थित बैंक के दो खातों में 99,824 रुपये की जमा राशि शामिल है.

हलफनामे के अनुसार, उनकी किसी कंपनी में कोई शेयर नहीं है और न ही उनकी अपनी कार या जमीन है.

उनके जेवरात में 48,000 रुपये की सोने की एक चेन और उतने की रुपये का सोने का एक लॉकेट के अलावा, 16,000 रुपये की सोने की एक अंगूठी और 81,000 रुपये का चांदी का एक कमंडल के साथ-साथ चांदी की एक थाली और चार ग्लास शामिल हैं.

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर (Sadhvi Pragya Thakur) ने यह भी घोषणा की कि उनके पास चांदी मढ़ी हुई एक ईंट है जिस पर राम उत्कीर्ण है. उन्होंने अपने हलफनामे में जिक्र किया है कि उनकी आय का स्रोत भिक्षा है.

ठाकुर ने हलफनामे में उनके खिलाफ विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत में दर्ज तीन आपराधिक मामलों का जिक्र किया है. हलफनामे के अनुसार, उन पर कथित तौर पर हत्या, हत्या की कोशिश और आतंकवादी कार्य के आरोप हैं.

साध्वी प्रज्ञा (Sadhvi Pragya) के आपराधिक रिकॉर्ड में उनके खिलाफ महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव के आजाद नगर थाने में दर्ज एक एफआईआर

(संख्या : 130/2008) शामिल है. प्रज्ञा सिंह ठाकुर 2008 के मालेगांव धमाका मामले में आरोपी हैं, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी. वह इस समय जमानत पर हैं.

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