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आने वाले सालों में धरती से गायब हो जाएंगी ये 6 चीजें, NO.1 पर है यह चीज

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दोस्तो दिन-ब-दिन टेक्‍नोलॉजी इतनी तरक्‍की करती जा रही है, कि आने वाले समय में बहुत सारी चीज़ें दिखाई ही नहीं देंगीं। दोस्तो हो सकता है कि जिन चीज़ों के बिना आज आप रह नहीं पाते हैं,

वो आने वाले समय में विलुप्‍त हो जाएं।जी हां, दोस्तो टेक्‍नोलॉजी की वजह से कई ऐसी चीज़ें हैं, जो अब लगभग विलुप्‍त होने की कगार पर हैं। तो चलिए दोस्तो जानते हैं इन चीजो के बारे में जो आपसे दूर जाने वाली है।

1.नोट

दोस्तो आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ सालों बाद आपके पर्स में नोट नहीं बल्कि प्‍लास्टिक मनी होगी। मोबाइल टेक्‍नोलॉजी की वजह से ज्‍यादातर पैसों का लेनदेन ऑनलाइन हो जाएगा।

2. आंखों का चश्‍मा

दोस्तो आने वाली पीढ़ी कमज़ोर आंखों के लिए चश्‍मे की जगह कॉन्‍टैक्‍ट लैंस का इस्‍तेमाल पसंद करेगी। कॉन्‍टैक्‍ट लैंस फैशनेबल लगते हैं इसलिए लोग चश्‍मे की जगह लैंस को ही प्राथमिकता देंगें।

3. चाबियां

दोस्तो हाल ही में कार्ड रीडर और गाडियों में सेल्‍फ स्‍टार्ट सिस्‍टम लांच हुआ है। अब बड़ी संख्‍या में लोग सेल्‍फ स्‍टार्ट के आदी होते जा रहे हैं,

इसके परिणामस्‍वरूप आने वाले समय में चाबियों का कोई अस्तित्‍व ही नहीं रहेगा। घरों और लॉकर में लॉक के लिए कार्ड रीडर का इस्‍तेमाल किया जाएगा।

4. फोर व्‍हीलर के गियर

दोस्तो टेक्‍नोलॉजी के कई गुना आगे बढ़ने के बावजूद आज भी कई कारों में गियर लगे होते हैं। लेकिन कारों के नए मॉडलों में ऑटोमैटिक गियर आते हैं। आने वाले दिनों में गाडियों के अंदर गियर भी पुराने ज़माने की बात हो जाएगी।

5. डिब्‍बे वाला टीवी

दोस्तो अब तो एलईडी और एलसीडी टीवी का ज़माना है। आज बहुत ही कम घरों में पुराने ज़माने के डिब्‍बे वाले टीवी होंगें। अब तो लोग एलसीडी और स्‍मार्ट टीवी लेना पसंद करते हैं।

6. स्‍टाम्‍प

दोस्तो आज भी कई लोग स्‍टाम्‍प कलेक्‍ट करना पसंद करते हैं और अब भी इनका प्रयोग शिप पैकेज जैसे कामों में इस्‍तेमाल होता है। लेकिन बहुत जल्‍द स्‍टाम्‍प का चलन भी खत्‍म हो जाएगा और स्‍टाम्‍प सिर्फ लोगों के कलेक्‍शंस में ही नज़र आएंगें।

दोस्तों कमेंट करके बताएं कि आपको हमारी पोस्ट कैसी लगी।

चिदम्बरम और कार्ति की बढ़ी मुश्किलें, जमानत के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट पहुंची ED

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तिहाड़ जेल में सजा काट रहे कांग्रेस के वरिष्इ नेता और पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की मुश्किले कम होती दिखाई नहीं दे रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एयरसेल-मैक्सिस मामले में चिदम्बरम और उनके बेटे कार्ति चिदम्बरम को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग करते हुए वीरवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

ईडी की अर्जी पर शुक्रवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई होने की संभावना है। ईडी ने पांच सितंबर को दिए गए विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी है जिसमें चिदम्बरम और उनके बेटे को अग्रिम जमानत की मंजूरी दी गई थी।

चिदंबरम 21 अगस्त को आईएनएक्स मीडिया केस में सीबीआई के द्वारा गिरफ्तार किए गए थे और फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं।

बता दें कि 2006 में चिदंबरम के वित्त मंत्री के तौर कार्यकाल के दौरान नियमों का उल्लंघन कर विदेशी फर्म को FIPB का अप्रूवल मामले की सीबीआई जांच कर रही है, वहीं एयरसेल-मैक्सिस केस में पी. चिदंबरम और कार्ति के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच ईडी कर रही है।

चीनी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था है खास, उनकी कार के बारे में जाने सब कुछ

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1 अक्टूबर को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं। इस दौरान वह भारत में शिखर वार्ता में शामिल होंगे। यहां सुरक्षा शी जिनपिंग की सुरक्षा की व्यवस्था 3 लेयर में होगी। चीनी राष्ट्रपति अपने साथ बड़ा सुरक्षा काफिला लेकर चलते हैं और जिस कार में बैठते हैं तो और भी खास है। तो आइए जानते हैं शी जिनपिंग के सुरक्षा और उनके कार के बारे में…

आइए जानते हैं शी जिनपिंग के सुरक्षा के बारे में…

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा का जिम्मा चीन की सेंट्रल सेक्योरिटी ब्यूरो पर है। लेकिन विदेशी दौरों में जिनपिंग की सुरक्षा काफी हद तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरह होती है। चीन के सेंट्रल सेक्योरिटी ब्यूरो के प्रमुख वांग शाओजुन उनके साथ साये की तरह होते हैं।

जानें चीन के सेंट्रल सेक्योरिटी के बारे में

बता दें कि चीन के सेंट्रल सेक्योरिटी ब्यूरो का गठन 1949 में चीन राष्ट्रप्रमुख माओत्से तुंग को सुरक्षा देने के लिए हुआ था। उसके बाद से वो चीन के सभी राष्ट्रपतियों और कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं को सुरक्षा देते आ रहे हैं। लेकिन माना जाता है कि शी की सुरक्षा जिस तरह मजबूत किले की चाकचौबंद है, वैसी किसी चीनी राष्ट्रपति की नहीं रही है।

सिक्योरिटी ब्यूरो में करीब 8000 जवान हैं

सिक्योरिटी ब्यूरो में करीब 8000 जवान हैं। ये सेक्यूरिटी रेजीमेंट सात ग्रुप और 36 रेजीमेंट्स में बंटी हुई है। जिनपिंग की सुरक्षा करने वाले कमांडो चीन में निर्मित 05 मशीनगन और ब्राजीली पिस्टल पीटी 709 से लैस होते हैं।

ऐसी रहती है फ्लीट

शी के फ्लीट में सबसे आगे पायलट वाहन चलते हैं। इसके पीछे चार मोटर साइकल सवार पायलट गार्ड्स। इसके पीछे चार से छह कारें, जिसमें सुरक्षा के जवान और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है। फिर शुरू होता है शी जिनपिंग की असली सिक्योरिटी। जिसमें कई बाइक सवार कमांडो उनके अंदरूनी कार काफिले के आगे चल रहे होते हैं।

अंदरूनी कार काफिले में दस से 12 वाहन होते हैं। ये सब अलग अलग काम कर रहे होते हैं। इसी काफिले में शी की खास बख्तरबंद लिमोजिन कार होंकी एन 501 होती है।

कैसी है ‘जिनपिंग’ कार जिस पर करते हैं वह सफर

कार में हैं चार दरवाजे

ये लंबी और काले रंग की लेबोजिन है। इसकी खिड़की और दरवाजे भारी और हथियारयुक्त होते हैं। चार दरवाजों वाली इस कार में कम्युनिकेशन के पुख्ता इंतजाम होते हैं। बताया जाता है कि इसमें कई और खास सिक्योरिटी के इंतजाम हैं। जिसका अभी तक खुलासा नहीं किया गया है।

ये है चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नई लिमोजिन होंकी एन 501 कार, जिसे खास तरीके से ऐसा बनाया गया है कि इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित कारों में गिना जाता है।

ये है कार की खासियत

ये कार चीन की सबसे बड़ी आटोमोबाइल कंपनी ने खासतौर पर उनके लिए बनाई है। बाजार में इसकी कीमत वैसे तो साढ़े पांच करोड़ है। इस कार की फ्रंट ग्रिल लंबी है। ये 402 हार्स पॉवर की है। सिंगल गैस टैंक फुल होने पर 500 मील तक दौड़ सकती है। 18 फीट की ये सेडान एक लग्जरी कार है। टर्बो चार्ज्ड इंजन इसे गजब की ताकत देता है।

भारत भी आएगा ये ‘शी’ के सुरक्षा का काफिला

जब शी जिनपिंग भारत में आएंगे तो उनकी ये सुरक्षा और कारों का काफिला यहां भी आएगा। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति चीन के आईटीसी चोला होटल में ठहरेंगे।

राफेल के बाद फ्रांस ने भारत को दिया एक और शानदार प्रस्ताव, विपक्षी दल रह जाएंगे हैरान

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भारत ने 8 अक्टूबर को फ्रांस से पहला राफेल विमान हासिल किया। लेकिन इसके दो दिनों के ही भीतर भारत को फ्रांस से एक और जोरदार प्रस्ताव मिला है। जिससे विपक्षी दल हैरान रह जाएंगे।

राफेल के इंजन को देखते राजनाथ सिंह (फोटो : ट्विटर)

राफेल लड़ाकू विमान के इंजन बनाने वाली फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी सफरान ने भारत में ही इसके स्वदेशी इंजन बनाने के लिए मदद की पेशकश की है। कंपनी ने इसके लिए बाकायदा एक प्रस्ताव रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के पास भेजा है।

एयरोस्पेस कंपनी सफरान के सीईओ ओलिवियर एंड्रीज ने कहा कि भारत में ही राफेल के स्वेदशी इंजन तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए वह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने को तैयार है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफरान के कारखाने का दौरा किया था।

डीआरडीओ हमारे द्वारा भेजे गए प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है। हम टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करना चाहते हैं। इससे भारत में पहले स्वदेशी लड़ाकू विमान इंजन का रास्ता तैयार हो सकता है। मिराज जेट विमान में भी इसी कंपनी के एम-53 वेरिएंट का इंजन का इस्तेमाल किया जाता है।

राफेल विमान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एक प्रजेंटेशन के द्वारा कारखाने के कामकाज को बताया गया। अगर प्रस्ताव कारगर हुआ तो इससे मेक इन इंडिया को तेजी मिलेगी। इसका मतलब यह है कि भारत इस इंजन को बनाकर विदेश में निर्यात भी कर सकता है।

फ्रांस के रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने भारत को राफेल सौंपे जाने के कार्यक्रम के बाद कहा था कि हम मेक इन इंडिया नीति का समर्थन करेंगे।

हमें भविष्य की बात करनी चाहिए। यह सिर्फ एक लड़ाकू विमान हासिल करने का मसला नहीं बल्कि सैन्य साझेदारी को बेहतर करने का मामला है। हम आपकी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपना पूरा प्रयास करेंगे।

राफेल का इंजन देखते राजनाथ सिंह

इस बात के लिए भी अध्ययन किया गया है कि भारत में बनने वाले हल्के लड़ाकू विमान तेजस के लिए स्वेदशी इंजन बनाने में सफरान से किस तरह की मदद ली जा सकती है। भारत और फ्रांस में लगातार प्रतिरक्षा रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश हो रही है।

लंबे इंतजार के बाद भारत को पहला फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल मिला है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को शस्त्र पूजा करने के साथ ही दसॉ कंपनी से पहले राफेल विमान को रिसीव किया।

हालांकि, भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने में राफेल विमान को अभी लंबा वक्त लगेगा, क्योंकि अभी तो भारतीय वायुसेना के जवानों की ट्रेनिंग शुरू होगी। भारत फ्रांस से कुल 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद रहा है।

देश का यह पूर्व क्रिकेटर बन सकता है …. कांग्रेस का अध्यक्ष कल हो सकती है घोषणा

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इस साल के अंत या नए साल की शुरुआत में दिल्‍ली में विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) हो सकते हैं. बीजेपी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) चुनाव की तैयारियों में जुट गई हैं,

लेकिन कांग्रेस (Congress) के पास नेतृत्‍वहीनता की स्‍थिति के कारण पार्टी रणनीति तय नहीं कर पा रही है. इसी हालात को देखते हुए कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) दिल्‍ली प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष की तलाश में जुट गई हैं

और संभव है कि शुक्रवार तक नए प्रदेश अध्‍यक्ष का ऐलान हो जाए. माना जा रहा है कि बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए इस नेता को दिल्‍ली की कमान थमा दी जाएगी. हालांकि गुटों में बंटी दिल्‍ली कांग्रेस अध्‍यक्ष पर नियुक्‍ति आलाकमान के लिए आसान नहीं होगी.

बीते जुलाई माह में दिल्‍ली प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष का पद शीला दीक्षित के निधन के बाद से खाली चल रही है. पहले खबर आई थी कि पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह से मतभेदों के चलते सरकार से अलग होने वाले नवजोत सिंह सिद्धू को दिल्‍ली कांग्रेस की कमान दी जा सकती है,

लेकिन शायद राहुल गांधी की नजदीकी के चलते उनका नाम रेस से बाहर हो गया है. अब इस रेस में बीजेपी से कांग्रेस में आए और झारखंड के धनबाद लोकसभा सीट से चुनाव हार चुके कीर्ति आजाद का नाम सबसे आगे चल रहा है.

कीर्ति न सिर्फ क्रिकेट के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं, बल्कि बिहार के दरभंगा से दो बार सांसद भी रह चुके हैं. कीर्ति आजाद के अलावा संदीप दीक्षित और जेपी अग्रवाल भी रेस में शामिल हैं.

कीर्ति आजाद 1993 में गोल मार्केट विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के विधायक चुने गए थे. 1998 में उन्होंने शीला दीक्षित के खिलाफ गोल मार्केट से ही चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए.

इसी साल फरवरी में कीर्ति आजाद ने बीजेपी छोड़ धनबाद से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जहां से उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस कीर्ति आजाद को प्रदेशाध्‍यक्ष की जिम्‍मेदारी सौंपकर पूर्वांचल और बिहार के लोगों के वोट बैंक को हथियाना चाहती है.

आम आदमी पार्टी की भी इन वोटरों पर खास निगाह है और बीजेपी ने तो पूर्वांचल के दिग्‍गज भोजपुरी गायक और अभिनेता मनोज तिवारी को पहले ही प्रदेशाध्‍यक्ष की जिम्‍मेदारी दे रखी है.

कीर्ति आजाद के अलावा जो नेता दिल्‍ली प्रदेश अध्‍यक्ष पद की दौड़ में हैं, उनमें जेपी अग्रवाल भी शामिल हैं, जो सोनिया गांधी के करीबी माने जाते हैं.

संदीप दीक्षित भी अध्यक्ष की कुर्सी के प्रमुख दावेदार हैं. वे दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे हैं और पूर्वी दिल्ली सीट से दो बार सांसद चुने जा चुके हैं.

पार्टी में यह भी चर्चा है कि दिल्ली की कमान किसी युवा नेता को दी जाएगी, जिसमें तीन कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ, देवेंद्र यादव और राजेश लिलोथिया शामिल हैं.

इन सबके अलावा कुछ और युवा चेहरे और पार्टी प्रवक्ता भी अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हैं.

जल्द ही चार मुख्यमंत्री के भाग्य का होगा फैसला, नंबर 4 की कुर्सी पर है खतरा

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लोकसभा चुनाव 2019 में भारी जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को रूप देना शुरू कर दिया है. फरवरी 2020 तक चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं.

चार मुख्यमंत्रियों के भाग्य का फैसला होना है. सबसे बड़ी बात है कि इसमें से तीन राज्यों में अभी भाजपा की सरकार है.

अगले साल के शुरुआत में होने वाले चुनाव में ही गैर भाजपाई सरकार के भविष्य का फैसला होना है. आइए जानते हैं कि किन मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है…

राज्य के दूसरे सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने थे देवेंद्र फड़नवीस. (फोटो : गूगल)

नंबर 1 : देवेंद्र फड़नवीस

महाराष्ट्र के युवा मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की प्रतिष्ठा इस बार के विधानसभा चुनाव से जुड़ी हुई है। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा व शिव सेना के गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है।

ऐसे में अक्टूबर 2014 में महज 44 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने देवेंद्र फड़नवीस के सामने एक बार फिर सरकार बचाए रखने की चुनौती है। उन्हें कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गठबंधन से मुकाबला करना है।

मनोहर लाल खट्‌टर ने आरएसएस प्रचारक से शुरू किया था राजनीतिक जीवन. (फोटो : गूगल)

नंबर 2 : मनोहर लाल खट्‌टर

2014 के विधानसभा चुनाव में हरियाणा में जब भारतीय जनता पार्टी को बेजोड़ सफलता मिली तो आरएसएस में प्रचारक से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले मनोहर लाल खट्‌टर को अचानक मुख्यमंत्री बना दिया गया।

2019 के लोकसभा चुनाव में खट्‌टर सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाया गया।

लेकिन, विरोधियों को उनकी राजनीतिक क्षमता का परिचय लोकसभा चुनाव के परिणाम में नजर आया। ईमानदार छवि के इस राजनेता को हरियाणा के लोग एक बार फिर स्वीकार करते हैं या नहीं, देखने वाली बात होगी।

पीएम मोदी व अमित शाह के करीबी माने जाते हैं रघुवर दास. (फोटो : गूगल)

नंबर 3 : रघुवर दास

झारखंड के छठे मुख्यमंत्री बने रघुवर दास राज्य के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया है। ईमानदार छवि व कड़े फैसले लेने वाले मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहचान है।

28 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले रघुवर दास ने पांच बार विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है।

पीएम नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के काफी करीबी माने जाते हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में उनके भी भाग्य का फैसला होना है।

अरविंद केजरीवाल के सामने है अपनी साख बचाने की चुनौती. (फोटो : गूगल)

नंबर 4 : अरविंद केजरीवाल

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 में आम आदमी पार्टी ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसके बारे में किसी भी राजनीतिक पंडित ने सोचा भी नहीं था।

महज नौ माह पहले दिल्ली की सभी सातों सीट पर भाजपा ने पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव 2014 में पार्टी का झंडा फहराया था।

लेकिन, फरवरी 2015 में राज्य की 70 में से 67 सीटें जीतकर अरविंद केजरीवाल नायक बनकर उभरे। हालांकि, पिछले पांच वर्षों में अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता का ग्राफ नीचे ही गया है।

पहले लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान कांग्रेस से गठबंधन करने की व्याकुलता ने पार्टी को अलग ही स्तर पर पहुंचाया है। ऐसे में उनको कुर्सी बचाने के लिए पूरा जोर लगाना होगा।

अगर ये तीन मुख्यमंत्री एक हो गए तो नरेंद्र मोदी की जीत में बन सकते हैं बाधा

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लोकसभा चुनाव से पहले ही सभी दल अपने -अपने जीत का दावा कर रहे हैं. नरेद्र मोदी को भाजपा ने प्रधानमंत्री का चेहरा बनाया हुआ है.

वहीँ विपक्ष में एकता की कमी दिख रही है. इसके साथ साथ ही कई वपक्षी नेता खुद को प्रधानमंत्री के पद की दावेदारी में पेश कर कर रहे है. जानिए उनके नाम और बारे में.

ममता बनर्जी हैं प्रबल दावेदारी में

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्ष की तरफ से प्रधानमन्त्री के पद की दावेदारी में हैं. उनकी पार्टी तृणमूल दल पूरी तैयारी में है.

वहां पर इसके लिए लगभग लगभग सब फाइनल सा हो गया है. ममता बनर्जी ने मोदी लहर में बगाल में बड़ी जीत दर्ज की थी . उम्मीद हैं की इस बार उन्हें फिर लोकसभा में जीत मिलेगी.

चन्द्रबाबू नायडू हो गए हैं अलग

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्र बाबु नायडू मोदी सरकार से अलग हो गए हैं. जबकि ४ से अधिक समय तक मोदी सरकार में रहे. अब वो विपक्ष की भूमिका में हैं.

उन्हें उम्मीद हैं की इस बार मोदी सरकार को वो सत्ता पर बैठने से रोकने का प्रयास करेंगे. उन्हें भी लोकसभा चुनाव में कई सीटें मिली थीं.

अरविन्द केजरीवाल दिल्ली से पंजाब तक डालते हैं असर

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल दिल्ली की सभी सीटों के अलावा पंजाब और गोवा तक असर दाल सकते हैं. इसके लिए वो पूरा प्रयास भी कर रहे हैं. उनकी पार्टी पूरी तरह से लगी हुई है.

एक बार फिर से राजनीति में कदम रखने को तैयार संजय दत्त, 25 सितंबर इस पार्टी में होंगे शामिल

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बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है वो एक बार फिर राजनीति में उतर सकते हैं।

महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री महादेव जानकर ने इस बात का दावा किया है कि संजय दत्त राष्ट्रीय समाज पार्टी (RSP) के साथ जुड़ेंगे।

महादेव जानकर ने ऐलान किया है कि संजय दत्त उनकी पार्टी (राष्ट्रीय समाज पार्टी) में 25 सितंबर को शामिल होंगे। आरएसपी की वर्षगांठ पर संजय दत्त ने एक वीडियो जारी कर महादेव जानकर और उनकी पार्टी को बधाई दी है।

वीडियो में संजय दत्त ये कहते हुए नजर आ रहे हैं कि मैं राष्ट्रीय समाज पार्टी को बहुत बधाई और सफलता की शुभकामनाएं देता हूं।

पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री महादेव जानकर मेरे मित्र हैं। महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार में कैबिनेट मंत्री महादेव जानकर की पार्टी आरएसपी एनडीए की सहयोगी पार्टी है।

बता दें कि संजय ने 2009 में सपा के टिकट पर लखनऊ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन अवैध हथियार रखने पर कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने से वह चुनाव नहीं लड़ सके थे।

बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त इन दिनों काफी चर्चा में बने हुए हैं। जानकारी के लिए बता दें संजय दत्त 2009 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ से लोकसभा उम्मीदवार थे, लेकिन अदालत के कानून के तहत उनकी सजा को निलंबित करने से इनकार करने के बाद वह पीछे हट गए थे।

संजय दत्त लगभग 10 साल बाद एक बार फिर राजनीति के मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। महाराष्ट्र के एक मंत्री ने यह जानकारी दी।

राष्ट्रीय समाज पक्ष (आरएसपी) के संस्थापक एवं कैबिनेट मंत्री महादेव जानकर ने रविवार को यहां बताया कि संजय दत्त , 25 सितंबर को उनकी पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं।

जानकारी के लिए बता दें आरएसपी महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी पार्टी है।

पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री जानकर ने पार्टी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए घोषणा की, “…

हमने अपनी पार्टी के विस्तार के लिए फिल्म क्षेत्र में काम करना शुरू कर दिया है। जिसके तहत अभिनेता संजय दत्त भी 25 सितंबर को राष्ट्रीय समाज पक्ष में शामिल हो रहे हैं।”

देश के इन 5 बड़े नेताओं को भी हैं गंभीर बीमारी – सोनिया गाँधी की बीमारी जानकर चौक जायेंगे

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बीजेपी के लिए अगस्त का महीना अशुभ साबित हुआ। पहले हार्ट अटैक से सुषमा स्वराज की मौत हुई, उसके बाद अरुण जेटली की मौत टिश्यू कैंसर से हो गई।

लेकिन आपको बता दें कि देश के 7 अन्य नेता भी है, जो गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं। आइये जानते हैं इस लिस्ट में कौन-कौन से नेता शामिल हैं…

सोनिया गांधी:

सोनिया गांधी: इस साल वाराणसी में एक रैली के दौरान सोनिया गांधी बेहोश हो गई थीं। एक बार संसद की कार्यवाही के दौरान भी उन्हें चक्कर आ गया था।

डेकन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2011 में सोनिया गांधी ने अमेरिका में कैंसर का इलाज करवाया था।

वीरभद्र सिंह:

वीरभद्र सिंह: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह को शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (आईजीएमसी) में भर्ती किया गया है।

उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही है। डॉक्टर्स के मुताबिक, 85 साल के वीरभद्र को सर्दी-खासी ने जकड़ लिया है, जिस कारण वो सांस नहीं ले पा रहे हैं।

लालू प्रसाद यादव:

लालू प्रसाद यादव: चारा घोटाले मामले में जेल की सजा काट रहे लालू यादव कई बीमारियों से ग्रस्त हैं। झारखण्ड की राजधानी रांची के रिम्स में उनका इलाज चल रहा है।

लालू यादव को डायबिटीज के अलावा क्रेटनीन, प्रोस्टेट, किडनी में पथरी, यूरिक एसिड, हाइपर यूरिसीमिया, पेरेनियल इंफेक्शन जैसी बीमारियों हैं।

मनमोहन सिंह:

मनमोहन सिंह: कांग्रेस के नेता मनमोहन सिंह दो बार बाईपास सर्जरी करवा चुके हैं। एक बार 1990 में तो दूसरी बार 2009 में उनकी बायपास सर्जरी की गई थी।

इसके अलावा वो कार्पल टनल सिंड्रोम और प्रोस्टेट प्रॉब्लम्स और एंजियोप्लास्टी की भी सर्जरी करवा चुके हैं।

देवेंद्र फर्नांडीस:

देवेंद्र फर्नांडीस: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फर्नांडीसटाइप 2 डायबिटीज से ग्रस्त हैं। एक समय में उनका वजन 122 केजी पहुंच गया था। साल 2015 से वो इस बीमारी का इलाज करवा रहे हैं।

 

इन राजनेताओं की पत्नियां देती हैं सुंदर अभिनेत्रियों को मात, नंबर 1 है सबसे हॉट

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खूबसूरत महिलाओं में हमेशा भारतीय फिल्म अभिनेत्रियों की बात होती है, लेकिन कई भारतीय राजनेताओं की पत्नियां अभिनेत्रियों से सुंदरता में कम नहीं हैं। इन नेताओं की पत्नियों की सुंदरता और शालीनता की चर्चा हमेशा होती रहती है।

नई दिल्ली: खूबसूरत महिलाओं में हमेशा भारतीय फिल्म अभिनेत्रियों की बात होती है, लेकिन कई भारतीय राजनेताओं की पत्नियां अभिनेत्रियों से सुंदरता में कम नहीं हैं। इन नेताओं की पत्नियों की सुंदरता और शालीनता की चर्चा हमेशा होती रहती है।

प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया

कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रयदर्शिनी राजे सिंधिया किसी अभिनेत्री से सुंदरता में कम नहीं हैं।

प्रियदर्शिनी बरोडा के गायकवाड परिवार की राजकुमारी हैं। 2012 में फेमिना पत्रिका ने इन्हें विश्व की 50 सुंदरियों की सूची में शामिल किया था।

डिंपल यादव

डिंपल यादव का जन्म 15 जनवरी 1978 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। यह एक राजनेत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की धर्मपत्नी हैं।

राजनीतिक क्षेत्र में पहला चुनाव हारने के बाद उनके पति अखिलेश अपनी जीती कन्नौज लोकसभा की सीट उनके लिए छोड़ दी।

2012 में लोकसभा उपचुनाव में इन्होंने निर्विरोध जीत कर एक कीर्तिमान स्थापित किया। वह जितनी खूबसूरत हैं और उतनी ही शांत स्वभाव की हैं।

सारा अब्दुल्लाह पायलट

सारा अब्दुल्लाह राजस्थान के उपमुख्यमंत्री और दिवंगत राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट की पत्नी हैं। सारा जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह की बेटी हैं।

सचिन राजस्थान के गुज्जर परिवार के हैं जब कि सारा एक मुस्लिम परिवार से थीं। सारा ने पिछले कुछ सालों में समाजसेवा कर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

हरसिमरत कौर बादल

1966 में जन्मी हरसिमरत कौर शिरोमणी अकाली दल की सदस्य और पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल की पत्नी हैं।

जो स्वयं एक राजनेत्री और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हैं। वे भटिंडा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा की सांसद हैं।

पूजा शेट्टी देवड़ा

प्रसिद्ध व्यवसायी मनमोहन शेट्टी की पुत्री पूजा शेट्टी मुंबई के राजनेता मिलिंद देवड़ा की पत्नी हैं। पूजा शेट्टी एक फिल्म निर्माता हैं। साथ ही ये एडलैब्स इमेजिका की एमडी हैं।