क्या आप जानते है क्यों बनाई जाती हैं कैबिनेट कमेटियां, क्या होता है इसका काम। … जानकर चौक जायँगे

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लोकसभा चुनाव में एक बार फिर से जबरदस्त जीत दर्ज करने के बाद नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली,साथ ही तमाम मंत्रियों ने भी मंत्रीपद की शपथ ली।

सरकार के गठन के बाद आठ कैबिनेट कमेटियों का भी गठन किया गया है, जिसमे दो नई कमेटियां रोजगार और कौशल विकास को लेकर भी हैं।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इन कमेटियों का गठन क्यों किया जाता है। दरअसल यह कमेटियां भारत सरकार बिजनेस रूल्स 1961 के तहत काम करती हैं, जिसका जिक्र भारतीय संविधान के अनुच्छेद 77 (3) में किया गया है।

क्यों अहम हैं ये कमेटियां

संविधान के अनुसार सरकार के बेहतर कामकाज के लिए नियम बनाएंगे, साथ ही मंत्रालयों के मंत्रियों के बीच काम का आवंटन करेंगे। लेकिन बाद बाद में इस नियम में बदलाव किया गया,

जिसके बाद अब यह जिम्मेदारी संबंधित विभाग के मंत्री की होगी कि वह अपने मंत्रालय के कामों का आवंटन करें। लेकिन जब मामला एक से अधिक विभाग का होता है तो तब तक कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है जबतक इससे जुड़े सभी विभाग एकमत ना हो, ऐसी स्थिति से कैबिनेट का फैसला ही मान्य होगा।

कमेटियां कैसे काम करती हैं

प्रधानमंत्री स्टैंडिंग कमेटी का गठन करते हैं, जिसमे कैबिनेट मंत्री होते हैं। इस कमेटी के सदस्यों को प्रधानमंत्री की तरफ से विशेष काम का जिम्मा सौंपा जाता है। प्रधानमंत्री कमेटी के सदस्यों की संख्या घटा या बढ़ा सकते हैं।

इसके अलावा एडहॉक कमेटी होती है, जिसमे मंत्रियों का समूह होता है, जिसके सदस्यों का चयन कैबिनेट मंत्री या प्रधानमंत्री करते हैं।

इस कमेटी की भी जिम्मेदारी किसी विशेष विषय को लेकर होती है। बता दें कि यूपी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सरकार की नीतियां काफी ज्यादा बाधित हुई थीं क्योंकि सरकार ने अलग-अलग मंत्रियों को अलग-अलग काम सौंपा था।

नियुक्ति, आपूर्ति कमेटी

इस कमेटी का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को किया है, जिसमे कुल 8 सदस्य हैं, यह सबसे प्रमुख कमेटी होती है। यह कमेटी तीनों सेवा के मुखिया का चयन करती है, जिसमे मिलिट्री ऑपरेशन के डीजी, वायुसेना और सेना के प्रमुख भी शामिल होते हैं।

इसके अलावा डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के डीजी, रक्षा मंत्री के साइंटिफिक एवडवाजर, सहित तमाम अहम मुखियाओं की नियुक्ति यही कमेटी करती है। साथ ही आरबीआई के गवर्नर और इसके चारो अहम सदस्यों की भी नियुक्त यही कमेटी करती है। वहीं आपूर्ति कमेटी तमाम संगठन के अधिकारियों को आवास आवंटित करने का काम करती है।

वित्तीय मामले, संसदीय मामले की कमेटी

वित्तीय मामलों की कमेटी तमाम आर्थिक मामलों को लेकर अपने सुझाव देती है, साथ ही अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के लिए अपने सुझाव देती है। यह कमेटी 1000 करोड़ तक के निवेश तक के प्रस्ताव दे सकती है।

संसदीय मामलों की कमेटी संसद के सदनों को लेकर अपने सुझाव देती है, साथ ही संसद में सरकार के कामकाज पर नजर रखती है। इसके अलावा यह कमेटी गैर सरकारी कामकाज, तमाम खर्च आदि का भी ब्योरा रखती है।

राजनीतिक मामले, सुरक्षा कमेटी

राजनीतिक मामलों की कमेटी केंद्र और राज्य से जुड़ी समस्याओं का निपटारा करने में अपनी अहम भूमिका निभाती है। साथ ही तमाम आर्थिक और राजनितिक मुद्दों, आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपने सुझाव यह कमेटी देती है।

सुरक्षा कमेटी की बात करें तो यह कमेटी कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, नीतिगत मामलों से जुड़े मुद्दे जिसका प्रभाव विदेश नीतियों पर पड़ता है उसपर नजर रखती है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आर्थिक और राजनीतिक मामलों पर भी यह कमेटी नजर रखती है।

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