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लोकसभा चुनाव 2019 में भारी जीत से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को रूप देना शुरू कर दिया है. फरवरी 2020 तक चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं.

चार मुख्यमंत्रियों के भाग्य का फैसला होना है. सबसे बड़ी बात है कि इसमें से तीन राज्यों में अभी भाजपा की सरकार है.

अगले साल के शुरुआत में होने वाले चुनाव में ही गैर भाजपाई सरकार के भविष्य का फैसला होना है. आइए जानते हैं कि किन मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है…

राज्य के दूसरे सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने थे देवेंद्र फड़नवीस. (फोटो : गूगल)

नंबर 1 : देवेंद्र फड़नवीस

महाराष्ट्र के युवा मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की प्रतिष्ठा इस बार के विधानसभा चुनाव से जुड़ी हुई है। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में भाजपा व शिव सेना के गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है।

ऐसे में अक्टूबर 2014 में महज 44 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने देवेंद्र फड़नवीस के सामने एक बार फिर सरकार बचाए रखने की चुनौती है। उन्हें कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गठबंधन से मुकाबला करना है।

मनोहर लाल खट्‌टर ने आरएसएस प्रचारक से शुरू किया था राजनीतिक जीवन. (फोटो : गूगल)

नंबर 2 : मनोहर लाल खट्‌टर

2014 के विधानसभा चुनाव में हरियाणा में जब भारतीय जनता पार्टी को बेजोड़ सफलता मिली तो आरएसएस में प्रचारक से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले मनोहर लाल खट्‌टर को अचानक मुख्यमंत्री बना दिया गया।

2019 के लोकसभा चुनाव में खट्‌टर सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाया गया।

लेकिन, विरोधियों को उनकी राजनीतिक क्षमता का परिचय लोकसभा चुनाव के परिणाम में नजर आया। ईमानदार छवि के इस राजनेता को हरियाणा के लोग एक बार फिर स्वीकार करते हैं या नहीं, देखने वाली बात होगी।

पीएम मोदी व अमित शाह के करीबी माने जाते हैं रघुवर दास. (फोटो : गूगल)

नंबर 3 : रघुवर दास

झारखंड के छठे मुख्यमंत्री बने रघुवर दास राज्य के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया है। ईमानदार छवि व कड़े फैसले लेने वाले मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहचान है।

28 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले रघुवर दास ने पांच बार विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है।

पीएम नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के काफी करीबी माने जाते हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में उनके भी भाग्य का फैसला होना है।

अरविंद केजरीवाल के सामने है अपनी साख बचाने की चुनौती. (फोटो : गूगल)

नंबर 4 : अरविंद केजरीवाल

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 में आम आदमी पार्टी ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसके बारे में किसी भी राजनीतिक पंडित ने सोचा भी नहीं था।

महज नौ माह पहले दिल्ली की सभी सातों सीट पर भाजपा ने पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव 2014 में पार्टी का झंडा फहराया था।

लेकिन, फरवरी 2015 में राज्य की 70 में से 67 सीटें जीतकर अरविंद केजरीवाल नायक बनकर उभरे। हालांकि, पिछले पांच वर्षों में अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता का ग्राफ नीचे ही गया है।

पहले लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान कांग्रेस से गठबंधन करने की व्याकुलता ने पार्टी को अलग ही स्तर पर पहुंचाया है। ऐसे में उनको कुर्सी बचाने के लिए पूरा जोर लगाना होगा।

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