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लोकसभा चुनाव के बाद अब इन 4 राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव, चौथे राज्य पर लगी है भाजपा की इज्जत दांव पर

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देश में लोकसभा चुनाव पूरी तरह से संपन्न हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव के बाद अब देश के 4 महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।

इन 4 राज्यों में से 3 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। ऐसे में इन विधानसभा चुनावों में भाजपा की इज्जत दांव पर है।

1.महाराष्ट्र-

भाजपा शासित महाराष्ट्र राज्य में इसी वर्ष सितंबर या अक्टूबर महीने में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच गठबंधन है।

इस गठबंधन ने लोकसभा चुनाव में राज्य की 48 में से 41 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना तथा कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है।

2.हरियाणा-

90 विधानसभा सीटों वाले हरियाणा राज्य में इसी वर्ष चुनाव होने हैं। हरियाणा में इस समय मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार है।

लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। ऐसे में भाजपा एक बार फिर मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ सकती है।

3.झारखंड-

महाराष्ट्र और हरियाणा की तरह भाजपा शासित झारखंड में भी इसी वर्ष के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। झारखंड में भाजपा तथा आजसू पार्टी का गठबंधन है।

लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने झारखंड की 14 में से 11 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की है। इस बार झारखंड में भारतीय जनता पार्टी की जीत की राह लोकसभा चुनाव की तरह आसान नहीं दिख रही है।

4.दिल्ली-

केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस समय दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार है।

लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। ऐसे में अरविंद केजरीवाल के लिए इस बार दिल्ली की सत्ता की राह कठिनाई भरी साबित हो सकती है।

आपको क्या लगता है इन 4 राज्यों में कौन सी पार्टी चुनाव जीत सकती है, हमें कमेंट में जरूर बताएं। देश की महत्वपूर्ण खबरों को पाते रहने के लिए हमें फॉलो करें।

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प्रधानमंत्री मोदी जल्द रिटायर कर सकते है पीएमओ से 20 अफसरों को …… 2 नाम है सबसे बड़े

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल के साथ ही उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाली ब्यूरोक्रेसी टीम के कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत अधिकारियों का कार्यकाल पूरा हो रहा है.

इनमें उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और पीएम मोदी के प्रधान सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा के नाम भी शामिल हैं.

लेकिन यह तय माना जा रहा है कि पीएम मोदी इन दोनों अधिकारियों के कार्यकाल को आगे बढ़ाएंगे, लेकिन कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा समेत करीब 18 से 20 ब्यूरोक्रेट्स इस बार बदले जाएंगे.

दरअसल, पीएम मोदी के काम करने का एक खास अंदाज है. वे अपनी कैबिनेट चुनने के बाद दूसरा सबसे प्रमुख काम ब्यूरोक्रेट्स की एक टीम तैयार करते हैं.

ऐसा माना जा रहा है कि पीएम मोदी कैबिनेट की तरह ही यहां भी कुछ बड़े बदलाव करने वाले हैं. जानकारी के अनुसार, इस बार करीब 18-20 ब्यूरोक्रेट्स को उनके पदों से हटाकर नये ब्यूरोक्रेट्स को टीम में शामिल किया जाएगा.

15 जून को रिटायर हो रहे हैं कैबिनेट सचिव

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की खबर के मुताबिक, कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा आगामी 15 जून को रिटायर हो रहे हैं. इस बार उन्हें पद छोड़ना ही पड़ेगा, क्योंकि वह पहले ही दो बार अपनी रिटायरमेंट पर एक्सटेंशन ले चुके हैं.

इसी तरह रॉ (RAW) व दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के कई महत्वपूर्ण पद खाली हो रहे हैं. उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी ने अपने गुजरात सीएम रहने के दौरान के अनुभवों के आधार पर पीएम बनने के बाद ब्यूरोक्रेट्स की एक टीम तैयार की थी, जो सीधे पीएम मोदी को रिपोर्ट करती थी.

कौन लेगा पीके मिश्रा की जगह?

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा का जाना तय है. इसलिए इस पद के योग्य उम्मीदवार की तलाश जारी हो गई. फिलहाल इस पद के लिए सबसे आगे राजीव गौबा का नाम चल रहा है. वह भी एक सीनियर ब्यूरोक्रेट हैं.

बराक ओबामा ने की थी तारीफ, अमेरिकी अखबार ने 50 साल में नहीं हुआ ऐसा

पीएम मोदी के काम करने के इस अंदाज के बारे में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी अपनी राय व्यक्त की थी. उन्होंने ब्यूरोक्रेसी को लेकर उठाए गए पीएम मोदी के कदमों के बारे में कहा था कि पीएम मोदी ने भारत की ब्यूरोक्रेसी को सक्रिय कर दिया है.

इसके बाद अमेरिका के एक प्रमुख अखबार ने मोदी सरकार के बारे में विस्तार से एक रिपोर्ट प्रकाशित की. इसका शीर्षक पीएम मोदी के ब्यूरोक्रेसी को लेकर किए बदलावों के बारे में था.

इसमें दावा किया गया था कि पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के महज छह महीने में देश की ब्यूरोक्रेसी में जितना बदलाव कर दिया है उतना भारतीय सरकार के 50 सालों के इतिहास में नहीं हुआ.

ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्राध्यक्षों ने भी माना था लोहा

पीएम मोदी की ब्यूरोक्रेसी की मजबूत टीम को देखने के बाद ब्रिटेन के पीएम डेविड कैमरून और ऑस्ट्रेलिया के पीएम टोनी एबॉट ने भारतीय ब्यूरोक्रेसी टीम में हुए बदलावों और उसके नये रूप की बेहद तारीफ किया था. साथ ही दोनों यह बताना नहीं भूले थे ऐसा करने से भारत की ताकत काफी बढ़ गई है.

ब्यूरोक्रेट को दिया विदेश मंत्री का पद

ब्यूरोक्रेसी से आने वाले लोग एम मोदी की सरकार में कितना महत्व रखते हैं इसका संदेश पीएम मोदी ने एक ब्यूरोक्रेट को विदेश मंत्री बनाकर दे दिया है.

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अमेरिका ने मोदी सरकार को दिया तगड़ा झटका, किया ये बड़ा ऐलान, जानकर होंगे हैरान

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लोकसभा चुनाव-2019 में पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी समर्थित एनडीए गठबंधन ने प्रचंड बहुमत के साथ जीत दर्ज की। 30 मई को पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

उनके शपथ ग्रहण समारोह में अरविंद केजरीवाल से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जैसे दिग्गज नेता भी शामिल हुए। वहीं ममता बनर्जी इस समारोह में शामिल नहीं हुईं।

केंद्र में फिर से मोदी सरकार बनते ही एक बड़ी मुसीबत सामने आ गयी। अमेरिका ने मोदी सरकार को तगड़ा झटका देते हुए बड़ा ऐलान किया है।

बीजेपी की प्रचंड जीत पर अमेरिका ने की थी तारीफ

इस चुनाव में बीजेपी की जबरदस्त जीत पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी। वह अक्सर भारत की तारीफ करते हैं। लेकिन अब उन्होंने एक ऐसा ऐलान कर दिया जिसे जानकर आपको हैरानी जरूर होगी।

जानिए क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति

दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जीएसपी व्यापार कार्यक्रम के तहत भारत को प्राप्त लाभार्थी विकासशील देश का दर्जा खत्म करने का ऐलान किया है।

उन्होंने कहा,”मैंने यह तय किया है कि भारत ने अमेरिका को अपने बाजार तक सामान और तर्कपूर्ण पहुंच देने का आश्वासन नहीं दिया है, इसलिए 5 जून, 2019 से भारत को प्राप्त लाभार्थी विकासशील देश का दर्जा समाप्त करना बिल्कुल सही है।”

अमेरिका जल्द ही भारत को बड़ा झटका देने वाला है जिससे भारत को व्यापार में नुकसान उठाना पड़ सकता है. दरअसल अमेरिका भारत को मिले GSPदर्जे को खत्म करने के अपने फैसले पर कायम है

जिसके बाद अब वाइट हाउस ने ऐलान कर दिया है कि भारत को मिला ये दर्जा 5 जून 2019 को खत्म कर देगा. अमेरिका ने भारत के GSP दर्जे को खत्म करने की घोषणा 4 मार्च को की थी

जिसके बाद भारत को 60 दिनों का नोटिस भी दिया गया था. ये नोटिस 3 मई को खत्म हो गया है और अब बताया जा रहा है कि अमेरिकी सरकार भारत को दिए गए GSP दर्जे को 5 जून को वापस लेगी वापस लेगी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि, ‘भारत ने अब तक यह आश्वासन नहीं दिया है कि वह अपने बाजारों में अमेरिका को बेहतर पहुंच देगा.

क्या है GSP?

GSP यानी सामान्य तरजीही प्रणाली अमेरिकी की तरफ से दी जाने वाली तरजीह की सबसे पुरानी प्रणाली है. अमेरिका ये तरजीह व्यापार में दूसरे देशों को देता हैं. अमेरिका जिन देशों को GSP का दर्जा देता है

वो बिना किसी शुल्क के अमेरिका में निर्यात कर सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत 2017 में GSP के तहत मिलने वाले लाभ का सबसे बड़ा लाभार्थी था. इसके तहत भारत ने अमेरिका में 5.7 अरब डॉलरह का निर्यात किया था.

आप हमें इस पर अपनी राय जरूर दीजिये और हमें बताइये कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐसा ऐलान क्यों किया? साथ ही हमें फॉलो जरूर कीजिये।

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अगर मोदी – अमित शाह ने कर लिए ये 5 काम तो 2024 में फिर बनेगी मोदी सरकार 3 .0

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2019 में प्रचंड बहुमत से जीतकर मोदी सरकार को दूसरा कार्यकाल मिला है. जनता का दिल जितने के लिए मोदी सरकार के सामने अर्थव्यवस्था को पाटरी पर लाने की अहम जिम्मेदारी है.

लिहाजा मोदी सरकार के सामने कई प्रकार की आर्थिक चुनौतियां खड़ी है. इन चुनौतियों से मोदी सरकार को निपटना बहुत जरूरी है, जिससे सरकार 2024 के लिए भी अपनी तैयारियां कर सके.

आइए आपको बताते हैं उन आर्थिक चुनौतियों के बारे में, जिनसे मोदी सरकार को निपटने की सख्त जरूरी है. (ये भी पढ़ें: 24 घंटे मिलेगी सभी को बिजली! पावर सेक्टर के लिए मोदी सरकार ने बनाया 100 दिन का पावरपैक प्लान)

निवेश को बढ़ावा

मोदी सरकार को निवेश पर खास तौर से ध्यान देने की जरूरत है. जब तक निवेश में बढ़ावा नहीं दिया जाएगा, तब आर्थिक गति मिलना मुश्किल है. इकोनॉमिक ग्रोथ इन दिनों विवादित रही है. इसलिए आर्थिक वृद्दि और निवेश की सख्त जरूरत है.

भारत में निवेश पिछले कुछ साल से घटा है. साल 2011-12 में निवेश 34.3 फीसदी था, जोकि साल 2017-18 में गिरकर 28.4 फीसदी पर आ गया. सबसे ज्यादा चिंता की बात य है कि सेक्टरल लेवल में जीएसएफ घट रहा है.

उत्पादन और खनन जैसे रोजगार गहन क्षेत्रों में जीएसएफ का उत्पादन का अनुपात कम नहीं, बल्कि समय क साथ दिनों दिन घटता जा रहा है.

नई सरकार को चुनौती ये है कि निवेश के माहौल में सुधार करना है. पॉलिसी में आने वाली अड़चनों को दूर करना होगा. जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार आ सके. जिससे आर्थिक वृद्दि और रोजगार को बढ़ावा मिल सके.

घटती सेविंग को बढ़ाएं

भारत की अर्थव्यवस्था का मूल आधार बचत (सेविंग) हैं. ऐसे में बचत पर खास तौर से ध्यान देना होगा. साल साल 2011-12 में 33.8 फीसदी बचत होती थी, जो घटकर साल 2017-18 में 30.1 फीसदी पर पहुंच गई है.

घरेलू बचत साल 2011-12 में ग्रॉस सेविंग 68.2 फीसदी से घटकर 2017-18 में 56.3 फीसदी पहुंच गई है. वास्तविक रूप से घरेलू क्षेत्र की बचत कम हो गई है. इससे निवेश, वृद्धि और आर्थिक स्थिरता को खतरा बढ़ जाएगा.

इसी तरह से, साल 2011-12 में 7.8 लाख करोड़ रुपये संगठित बैंकों से पर्सनल लोन लिया गया. जो कि 8 साल में 19 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है.

143 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. जबकि घरेलू बचत में काफी गिरावट आई है. ऐसे लोन कि जिमेमेदारी एनबीएफसी सेक्टर की नहीं है.

रोजगार और सामाजिक सुरक्षा

पिछले कुछ सालों से रोजगार सृजन का मुद्दा काफी विवादित रहा. सा ल2016 में अंतिम सर्वे से पता चला कि केवल 17 फीसदी लोग ही संगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं. एक तिहाई लोगों को कैजुअल लेवल पर काम दिया जाता है. संयोग से अब ऐसे सर्वे बंद हो चुके हैं.

लेकिन जब हम भारत की बेरोजगारी दर के अधिकारिक आंकड़ों पर चर्चा करते हैं तब इसकी चुनौती केवल रोजगार सृजित करने की नहीं, बल्कि रोजगार की गुणवत्ता में सुधार की भी जरूरत रहती है.

पांचवें रोजगार-बेरोजगार सर्वे से पता चलता है कि, काम के लिए मौजूद लोगों में से 60.6 फीसदी लोगों को देश में रोजगार मिला.

जबकि रूरल एरिया में 52.7 फीसदी लोगों को काम मिला. 42.1 फीसदी लोगों को 6 से 11 महीने के लिए आंशिक रूप से काम मिला. सरकार के लिए रोजगार देने के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है. सरकार को जरूर तहै कि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार देकर बेरोजगारी के आंकड़े को कम करे.

राजस्व घाटा कम करना

सरकार को सबसे बड़ी चुनौती है अपने राजकोषीय घाटे को कम करना. सरकार के लिए महत्वपूर्ण है कि राजस्व घाटे को नियंत्रण में रखे. हालांकि, सरकार अपने बुनियादी ढांचे जैसे उत्पादक उद्देश्यों पर अपने खर्च को संभाले रह सकती है.

जिससे राजकोषीय घाटे को कम करना आसान हो सकता है. साल 2019-20 में राजस्व घाटे का लक्ष्य 2.2 फीसदी रखा गया है. रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के लिए फिस्कल स्पेस बनाने के लिए सरकार को राजस्व घाटे क जीरो करने की जरूरत है.

वित्तीय क्षेत्र में सुधार की जरूरत

मजबूत वित्तीय सेक्टर का मतलब होता है कि सेविंग में ग्रोथ हो और निवेश को बढ़ावा मिले. बैंकिंग सेक्टर में मंडरा रहे संकट के बादलों को खत्म करना होगा. साथ ही ही बढ़ रहे एनपीए को भी कम करना होगा.

यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की जिम्मेदारी है कि लोन ग्रोथ जीडीपी ग्रोथ के बराबर रखने की कोशिश करे. अन्यथा अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है.

नई सरकार के सामने आर्थिक लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार और आरबीआई के बीच बेहतर तालमेल रहे. कुल मिलाकर सरकार को अपनी जनता पर भरोसा बनाए रखने के लिए आर्थिक चुनौतियों पर खास तौर से ध्यान देना होगा. ताकि मोदी सरकार की साख बनी रहे.

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सोनाक्षी सिन्हा जल्द करने वाली है इस मुस्लिम लड़के के साथ शादी ? क्या पिता शत्रु होंगे तैयार ?

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बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में आए दिन किसी ना किसी सेलिब्रिटी के अफेयर या रिलेशनशिप का खुलासा होता रहता है. इसी बीच खबर मिली है कि सोनाक्षी सिन्हा जल्दी शादी कर सकती है.

सोनाक्षी सिन्हा फिलहाल अपनी आने वाली फिल्म कलंक के प्रमोशन में मशगूल है. यह फिल्म 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली है.

इस फिल्म में वरुण धवन, आलिया भट्ट, माधुरी दीक्षित, संजय दत्त और आदित्य रॉय कपूर जैसे बड़े सितारे मौजूद हैं.

हर दिन शादी की खबरें तो आती है। लेकिन इस बीच एक ऐसे खबर सामने आई है, कि बहुत जल्द सोनाक्षी सिन्हा शादी करने वाली है।

वैसे तो सोनाक्षी इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म कलंक के प्रमोशन में व्यस्त हैं। ये फिल्म 17 अप्रैल को रिलीज होने वाली है।

खबरों के अनुसार सोनाक्षी इन दिनों फिल्म नोटबुक के एक्टर जहीर इकबाल को डेट कर रहीं हैं। जहीर, सोनाक्षी को इंस्टाग्राम पर फॉलो करते हैं, और अक्सर ही उनकी फोटोज पर कमेंट करते रहते हैं। बहुत बार सोनाक्षी और जहीर एक साथ घूमते भी नज़र आ चुके है।

बहुत जल्द फिल्म कलंक में सोनाक्षी सिन्हा नज़र आने वाली हैं। इस फिल्म के अलावा सोनाक्षी दबंग 3 और मिशन मंगल का हिस्सा हैं। जल्द ही वो इन दोनों फिल्मोंं की शूटिंग शुरु करेंगी।

हाल ही में कलंक फिल्म के स्टार फिल्म के प्रमोशन के लिए एक डांस शो पर पहुंचे थे. इसी शो में उन्होंने बताया कि वह जल्द शादी कर सकती हैं

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के हिसाब से वह इन दिनों अभिनेता जाहिर इकबाल के साथ डेट कर रही हैं, जो नोटबुक फिल्म में काम कर चुके हैं


Third party image reference

जहीर इकबाल इंस्टाग्राम पर सोनाक्षी की हर तस्वीर पर लाइक और कमेंट जरूर करते हैं. इन दोनों को कई बार साथ देखा गया है. अब इंतजार इस बात का है कि इसका खुलासा कब होगा.

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ये है मोदी के फिल्मी 7 सितारे … जिन्होंने दिग्गज नेताओ को हराया .. नंबर 1 को थी मंत्री बनने की उम्मीद

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लोकसभा 2019 के चुनाव में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद बीजेपी एक बार केंद्र में वापसी कर चुकी है.

जहां एक तरफ नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली वहीं दूसरी तरफ मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा चुका है.

ऐसे में इस बार के चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा में सिनेमा जगत से जुड़े हुए वो सितारे रहे जिन्होंने राजनीति का दमन थाम लिया.

बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा और मथुरा से लगातार दूसरी बार सांसद चुनकर आईं हेमा मालिनी ने साल 2019 के चुनाव में जबर्दस्त जीत हासिल की लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली.

पंजाब के गुरदासपुर से कांग्रेस के सुनील जाखड़ को हराकर जबर्दस्त जीत हासिल करने वाले सनी देओल ने चुनाव से पहले ही बीजेपी का दामन थाम कर राजनीति में कदम रखा था. जिसके बाद उन्होंने आते ही आते जीत भी हासिल कर ली लेकिन कैबिनेट में जगह नहीं बना सके.

लोकसभा चुनाव 2019 में भोजपुरी अभिनेता रविकिशन ने गोरखपुर लोकसभा से रिकॉर्ड मतों के साथ जीत हासिल की, लेकिन मंत्रिमंडल में उन्हें जगह नहीं मिली.

दिल्ली में कांग्रेस की शीला दीक्षित को हराकर जीत दर्ज करने वाले भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है.

बॉलीवुड से राजनीति में शामिल हुईं किरन खेर ने एक बार फिर जीत दर्ज की जिसके साथ वो दोबारा सांसद बनकर आईं, लेकिन उन्होंने भी मंत्रिमंडल में कोई भी जगह नहीं मिली.

क्रिकेटर से नेता बने गौतम गंभीर ने पूर्वी दिल्ली की लोकसभा सीट से चुनाव में जबर्दस्त जीत हासिल की, लेकिन उन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली.

गायिकी में अपना जलवा बिखेर चुके हंस राज हंस ने भी राजनीति में कदम रखते ही बीजेपी के प्रत्याशी के तौर पर उत्तर पश्चिमी दिल्ली की सीट से चुनाव लड़ा और जबर्दस्त जीत भी हासिल की, लें उन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली.

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अभी – अभी बड़ी खबर ….. वरुण गाँधी को लोकसभा टिकट को लेकर हुआ बड़ा खुलासा …. क्या इसी वजह से कटा था माँ का टिकट ??

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सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने अपनी ट्विटर के जरिये एक बड़ा खुलासा किया है। धर्मेंद्र यादव ने लिखा है कि वरुण गांधी महागठबंधन के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे।

दरअसल, शनिवार को वरुण गांधी ने कहा था कि जो लोग 15-20 साल पहले सैफई में गोबर के कंडे उठाते थे, वह आज करोड़ों की गाड़ी में चल रहे है।

इसी का जवाब देते हुए धर्मेंद्र यादव ने अपने ट्वीट पर लिखा है- “सैफई वाले हल चलाना भी जानते हैं और हुकूमत चलाना भी जानते हैं। परंतु गांधी जैसे लोग जो हमेशा से दलित, वंचित, पिछड़े, शोषित समाज से दुर्भावना रखते आए हैं, वे सामंत शाही सोच के पक्षधर ही रहेंगे।

अभी कुछ दिन पहले तक महागठबंधन से टिकट की जुगत में थे, अब साक्षात हार को देखकर बौखला गए हैं। ये वही वरुण गांधी हैं जिन्होंने सपा-बसपा गठबंधन से टिकट के लिए संपर्क किया था।

इससे पहले वरुण गांधी ने सुल्तानपुर में वरुण गांधी ने कहा था कि मैं यहां एक मां के लिए वोट मांगने के लिए आया हूं। वो मेरी मां नहीं, बल्कि देश की भारत मां है।

आज भारत मां आपसे पूछ रही है कि आप उनके साथ हैं या नहीं। आप उनके साथ हैं जिन्होंने मेरे सीने को चीरने-फाड़ने का काम किया है? या फिर आप नरेंद्र मोदी का साथ देंगे जिसने पाकिस्तान को अपने जूते के नीचे मसल दिया है।

वरुण गांधी ने ये भी कहा कि, गठबंधन के लोग तो पाकिस्तान के आदमी हैं, क्या आप इनको जिताएंगे? बताइए रामभक्तों पर गोलियां किसने चलवाईं और 500 लोगों को किसने मारा?

इसीलिए इनको श्राप लगा और इनके बेटे ने जूते मारकर निकाल घर से दिया। अब पब्लिक भी उन्हें जूते मारकर बाहर करेगी।

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हो गयी घोषणा ….. मोदी – शाह ने इस नेता को चुना पार्टी का अगला अध्यक्ष .. नाम जानकर चौक जायेंगे

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महज 4 लोकसभा और 3 राज्यसभा सीटें होने के बावजूद भी हिमाचल प्रदेश की देश की राजनीति में बड़ी भागीदारी सदा से ही रही है। नरेंद्र मोदी की दूसरी पारी में पहली बार भाजपा और केंद्र की सरकार में हिमाचल प्रदेश की बड़ी भागीदारी होने जा रही है।

बसपा-सपा महागठबंधन के बावजूद उत्तर प्रदेश में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन का बड़ा तोहफा जे.पी. नड्डा को मिलने जा रहा है।

सूत्रों की मानें तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के मोदी कैबिनेट में शामिल होने के बाद भाजपा के अगले अध्यक्ष के रूप में जे.पी. नड्डा की जल्द ताजपोशी हो सकती है।

अनुराग ठाकुर का मोदी कैबिनेट का हिस्सा बनना गौरव की बात

चौथी बार सांसद बने अनुराग ठाकुर भी मोदी कैबिनेट का हिस्सा बन गए हैं। इस छोटे राज्य के लिए यह बड़े गौरव की बात है कि देश के सबसे बड़े और सत्तारूढ़ राजनीतिक दल के अध्यक्ष हिमाचल के जे.पी. नड्डा होंगे।

रवीवार को दिनभर मोदी कैबिनेट के गठन को लेकर चली चर्चाओं के बीच यही समाचार आते रहे कि जे.पी. नड्डा इस बार कैबिनेट मंत्री के पद के लिए शपथ नहीं लेंगे।

हिमाचल प्रदेश से अनुराग ठाकुर को शपथ के लिए न्यौता मिल गया था लेकिन इसके बीच ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के शपथ लेने के समाचार आ गए और इसके साथ ही नए भाजपा अध्यक्ष पद के लिए जे.पी. नड्डा का नाम चल पड़ा।

मोदी ने विशेष तौर पर आमंत्रित किए थे जे.पी. नड्डा

सूत्रों की मानें तो यह सब पहले से तय था लेकिन इस मोदी काल में भाजपा के उच्च स्तरीय फैसलों को गोपनीय रखने की परंपरा के चलते अधिकारिक तौर पर इसका खुलासा नहीं हो पाया है।

रवीवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हीं नवनिर्वाचित सांसदों को अपने आवास पर चाय के लिए बुलाया था, जिनको कैबिनेट में शामिल किया जाना है

लेकिन प्रधानमंत्री ने जे.पी. नड्डा को चाय पर विशेष तौर पर आमंत्रित किया था। इससे भाजपा के सियासी गलियारों में यह चर्चा चल पड़ी कि अब भाजपा के अगले अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ही होंगे।

संगठन से मिले सभी दायित्वों को निभाने में अव्वल रहे हैं नड्डा

भारतीय जनता युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर पार्टी के महासचिव और राज्य तथा केंद्र में मंत्री रहते हुए जे.पी. नड्डा को जो भी दायित्व संगठन द्वारा सौंपा गया उसे उन्होंने बखूबी निभाया है।

उनके छत्तीसगढ़ में पार्टी के प्रभारी रहते हुए सरकार रिपीट हुई थी, उसके बाद उत्तराखंड के चुनाव प्रभारी रहते हुए वहां भी पार्टी सत्ता में आई थी। इसी तरह से अब उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रभारी रहते उनकी रणनीति से विपरीत माहौल में भी वहां भाजपा ने 62 सीटें जीती हैं।

यही नहीं जब अमित शाह को भाजपा अध्यक्ष बनाया गया था तब भी जे.पी. नड्डा का नाम सबसे आगे चल रहा था।

दुनिया की सबसे बड़ी नि:शुल्क स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत के बनाने और उसे पूरे देश में सफलता से लागू करने का मुख्य श्रेय भी नड्डा को ही जाता है।

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अभी – अभी बड़ी खबर ….. वरुण गाँधी को लोकसभा टिकट को लेकर हुआ बड़ा खुलासा …. क्या इसी वजह से कटा था माँ का टिकट ??

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सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने अपनी ट्विटर के जरिये एक बड़ा खुलासा किया है। धर्मेंद्र यादव ने लिखा है कि वरुण गांधी महागठबंधन के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे।

दरअसल, शनिवार को वरुण गांधी ने कहा था कि जो लोग 15-20 साल पहले सैफई में गोबर के कंडे उठाते थे, वह आज करोड़ों की गाड़ी में चल रहे है।

इसी का जवाब देते हुए धर्मेंद्र यादव ने अपने ट्वीट पर लिखा है- “सैफई वाले हल चलाना भी जानते हैं और हुकूमत चलाना भी जानते हैं। परंतु गांधी जैसे लोग जो हमेशा से दलित, वंचित, पिछड़े, शोषित समाज से दुर्भावना रखते आए हैं, वे सामंत शाही सोच के पक्षधर ही रहेंगे।

अभी कुछ दिन पहले तक महागठबंधन से टिकट की जुगत में थे, अब साक्षात हार को देखकर बौखला गए हैं। ये वही वरुण गांधी हैं जिन्होंने सपा-बसपा गठबंधन से टिकट के लिए संपर्क किया था।

इससे पहले वरुण गांधी ने सुल्तानपुर में वरुण गांधी ने कहा था कि मैं यहां एक मां के लिए वोट मांगने के लिए आया हूं। वो मेरी मां नहीं, बल्कि देश की भारत मां है।

आज भारत मां आपसे पूछ रही है कि आप उनके साथ हैं या नहीं। आप उनके साथ हैं जिन्होंने मेरे सीने को चीरने-फाड़ने का काम किया है? या फिर आप नरेंद्र मोदी का साथ देंगे जिसने पाकिस्तान को अपने जूते के नीचे मसल दिया है।

वरुण गांधी ने ये भी कहा कि, गठबंधन के लोग तो पाकिस्तान के आदमी हैं, क्या आप इनको जिताएंगे? बताइए रामभक्तों पर गोलियां किसने चलवाईं और 500 लोगों को किसने मारा?

इसीलिए इनको श्राप लगा और इनके बेटे ने जूते मारकर निकाल घर से दिया। अब पब्लिक भी उन्हें जूते मारकर बाहर करेगी।

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क्या आपको पता है उन 4 विभागों की अहमियत जो मोदी ने अपने पास रखे … पहला विभाग है सबसे महत्वपूर्ण

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गुरुवार को शपथ ग्रहण के बाद शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कैबिनेट में शामिल मंत्रियों के विभागों को बंटवारा भी कर दिया गया।

जहां पीएम मोदी ने पिछली टीम से अलग इस नई टीम में कुछ नए लोगों का मौका दिया तो वहीं उन्‍होंने कुछ विभाग अपने पास रखे हैं।

पीएम मोदी ने परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग जैसे डिपार्टमेंट्स अपने पास रखने का फैसला किया है। पीएम के पास जो विभाग हैं,

वह अगले कुछ वर्षों तक देश के लिए काफी अहम साबित होने वाले हैं। जानिए क्‍या है देश का एटॉमिक एनर्जी या परमाणु ऊर्जा विभाग और क्‍यों पीएम ने इसे अपने पास रखा है।

पासपोर्ट के लिए मांगी मदद तो नए विदेश मंत्री के बेटे ने दिया ऐसा मजेदार जवाब

ट्रांसफर का अधिकार पीएम मोदी के पास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पीएमओ, कार्मिक मंत्रालय जिसके तहत ट्रांसफर और पोस्टिंग आती हैं, जन शिकायत और पेंशन मंत्रालय, एटॉमिक एनर्जी मंत्रालय, अंतरिक्ष मंत्रालय, नीति से जुड़े सभी मुद्दों के अलावा वे सभी विभाग हैं जो अभी तक किसी को नहीं सौंपे गए हैं।

पीएम मोदी ने अपनी कैबिनेट में गृह मंत्रालय अपने करीबी अमित शाह को दिया है तो रक्षा मंत्री का विभाग राजनाथ सिंह को गया।

वित्‍त मंत्रालय निर्मला सीतारमण को तो विदेश मंत्रालय पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को मिला है। जयशंकर की एंट्री राजनीतिक पंडितों के लिए चौंकाने वाली थी।

अंतरिक्ष विभाग का अहम मिशन चंद्रयान-2

पीएम मोदी ने जिन विभागों को अपने पास रखा है वे बेहद अहम हैं उनमें अंतरिक्ष मंत्रालय और इस वर्ष इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। इसकी निगरानी पीएम मोदी खुद करेंगे। जो बात सबसे अहम है वह है इस मंत्रालय के तहत ही इंडियन स्‍पेस एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) का आना।

इसरो 16 जुलाई को अपने चंद्रयान-2 मिशन को लॉन्‍च करेगा। इसरो के इस मिशन पर न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं। इसके अलावा इस वर्ष इसरो को पांच मिलिट्री सैटेलाइट्स लॉन्‍च करने हैं जिनमें से एक 22 मई को लॉन्‍च हो चुका है।

एटॉमिक एनर्जी डिपार्टमेंट भी पीएम मोदी के पास

डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (डीएई) 3 अगस्‍त 1954 को अस्तित्‍व में आया और तब से ही प्रधानमंत्री को इसका सीधा जिम्‍मा सौंपा गया। इस विभाग की शुरुआत राष्‍ट्रपति के एक आदेश के बाद हुई थी।

एटॉमिक एनर्जी या परमाणु ऊर्जा विभाग के पास देश की परमाणु क्षमता से जुड़ी टेक्‍नोलॉजी के अलावा कृषि, मेडिसिन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में रेडिएशन टेक्‍नोलॉजी के प्रयोग से जुड़ी रिसर्च को अंजाम देने की जिम्‍मेदारी होती है।

डीएई के तहत पांच रिसर्च सेंटर, तीन औद्योगिक संगठन, पांच पब्लिक सेक्‍टर्स की ईकाईयों के अलावा तीन सेवा संगठन आते हैं।

NSG में भारत की एंट्री पीएम मोदी का बड़ा चैलेंज

भारत ने पिछले वर्ष सितंबर में ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में हुए आईएईए सम्‍मेलन के दौरान जब एटॉमिक एनर्जी कमीशन के नए चेयरमैन के तौर पर कमलेश नीलकंठ व्‍यास को चार्ज सौंपा तो दुनिया भर में उसकी चर्चा हुई थी।

यह पहला मौका था जब डिपार्टमेंट का चार्ज विदेशी धरती में सौंपा गया था। पीएम मोदी पर इस वर्ष भारत को एनएसजी में एंट्री दिलाने की भी जिम्‍मेदारी होगी।

इसके अलावा इस तरफ भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं कि भारत में परमाणु ऊर्जा पर आधारित बिजली सप्‍लाई का जो वादा सरकार ने पहले कार्यकाल में किया था, उस पर किस दिशा में काम होगा।

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