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एग्जिट पोल के अनुसार MP में साध्वी प्रज्ञा और दिग्विजय सिंह में होगी किसकी जीत ? देखे जरुर

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लोकसभा चुनावों को लेकर विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए एग्जिट पोल के नतीजों पर यकीन करें तो मप्र का सियासी नजारा 2014 से बहुत ज्यादा जुदा नहीं होगा। किसी भी एग्जिट पोल में कांग्रेस की संभावनाएं दो डिजिट में नहीं पहुंच पा रही हैं।

सभी एग्जिट पोल भाजपा के लिए 22 से 27 और कांग्रेस के लिए दो से सात सीटें मिलने की संभावनाएं जता रहे हैं। सभी पोल में भाजपा क्‍लीन स्‍वीप करती नजर आ रही है।

टुडेज चाणक्य पोल के मुताबिक, प्रदेश में 2014 का आंकड़ा ही दोहराए जाने की उम्मीद है। पोल कहता है कि साढ़े चार माह पहले हुए विधानसभा चुनाव से उलट लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश से भाजपा को 27 और कांग्रेस को दो सीटें मिलने की उम्मीद है।

Exit Polls बोले – ‘…आएगा तो मोदी ही’, जानिए NDA को कितनी सीट मिलने के आसार

न्यूज 18 नेटवर्क के आईपीएसओएस के एग्जिट पोल में भी कमोबेश यही स्थिति है। इस सर्वे में भाजपा को 24 से 27 और कांग्रेस को दो से चार सीटें मिलने की उम्मीद है।

एबीपी न्यूज के नतीजे जरूर कांग्रेस को राहत देने वाले हैं। इस चैनल ने भाजपा को 22 और कांग्रेस को सात सीटें मिलने की उम्मीद जताई है। सी वोटर ने मप्र में भाजपा को 24 और कांग्रेस को पांच सीटें मिलने का अनुमान जताया है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सभी एक्जिट पोल गलत नहीं हो सकते

मप्र के 29 संसदीय क्षेत्रों के लिए अलग-अलग सर्वे के आंकड़े

रिपब्लिक टीवी- सी वोटर

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भाजपा- 24

कांग्रेस- 05

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भाजपा– 21से 24

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कांग्रेस 05 से 08

सीएनएन न्यूज 18- आईपीएसओएस

भाजपा– 25 से 27

कांग्रेस– 02 से 04

एबीपी न्यूज- नीलसन

भाजपा– 22

कांग्रेस–07

न्यूज 24 – चाणक्य

भाजपा– 27

कांग्रेस–02

आज तक – एक्सिस माय इंडिया

भाजपा–26 से 28

कांग्रेस — 1 से 3

Chhattisgarh Elections Exit Polls 2019 Live : छत्तीसगढ़ में भाजपा को ज्यादा सीटें

मध्यप्रदेश में लोकसभा की 29 सीटें हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा भोपाल सीट की रही, जहां दिग्विजय सिंह का मुकाबला साध्वी प्रज्ञा सिंह से हुआ।

प्रज्ञा सिंह और उनके बयानों के कारण भोपाल सीट पूरे देश में छाई रही। हर बार की तरह इस बार भी भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला हुआ। 2014 में भाजपा को 29 में से 27 सीटें मिली थीं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान मध्यप्रदेश में दिया था। उन्होंने यहां 16 रैलियां की । वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने यहां 8 जन सभाओं को संबोधित किया था।

मध्‍यप्रदेश में चार चरणाें में लोकसभा चुनाव संपन्‍न करवाए गए। देश में चौथे और मप्र में पहले दौर में सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट और छिंदवाड़ा में वोट डाले गए।

जबकि मध्‍यप्रदेश में दूसरे दौर में टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा, होशंगाबाद और बैतूल सीट के लिए मतदान कराया गया।

मध्‍यप्रदेश में तीसरे दौर में मुरैना, भिंड, ग्‍वालियर, गुना, सागर, विदिशा, भोपाल और राजगढ़ सीट पर वोट डाले गए।

देश के सातवें और मध्‍यप्रदेश के चौथे राउंड में देवास, उज्‍जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन और खंडवा सीट के लिए मतदान कराया गया ।

एग्जिट पोल के अनुसार भोपाल से भाजपा की साध्वी प्रज्ञा दिग्विजय सिंह पर भरी पड़ती दिखाई दे रही है 

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तानाशाह जिसने पत्नी के प्रेमी का सिर कटवाकर फ्रिज में रखा और … महारानी एलिजाबेथ को

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युगांडा एक ऐसा देश है जो भारतीयों को तानाशाह ईदी अमीन की खौफनाक याद भी दिलाता है. अमीन 70 के दशक में जब सैन्य तख्तापलट के बाद युगांडा के शासक बने थे. तब उन्होंने कहर ढहा दिया था.

एक आदेश पर उन्होंने हजारों भारतीय बाशिंदों को वहां से निकल जाने का आदेश दिया था. तब इसका असर वहां रह रहे 40 हजार भारतीयों पर पड़ा था. जो बिजनेस से लेकर नौकरियों तक में असरदार स्थितियों में थे.

ईदी अमीन के हटते ही बहुत से भारतीय मूल के लोग वापस युगांडा जाकर बस गए. वो अब वहां फिर बेहतर स्थितियों में हैं. युगांडा के शीर्ष दस धनी लोगों में तीन भारतीय हैं, उनका देश में खासा दबदबा है. वो वहां अपनी तमाम कंपनियों के जरिए हजारों लोगों को नौकरियां देते हैं.

भारतीयों को दो सूटकेस में जाने को कहा गया

ईदी अमीन का मानना था कि एशियाई लोग स्थानीय युगांडावासियों से अच्छा व्यवहार नहीं करते. साथ ही स्थानीय लोगों के पिछड़े होने की वजह एशियाई ही हैं.

लिहाजा रातों-रात फरमान जारी हुआ कि सारे एशियाई देश छोड़कर चले जाएं. तब भारतीयों को संपत्तियां छोड़कर परिवार के साथ वहां से पलायन करना पड़ा.

अमीन ने जब एशियाइयों को वहां से जाने का आदेश दिया तो ये भी कहा कि निर्वासित होने वाले एशियाई अपने केवल दो सूटकेस और 55 पाउंड ही ले जा सकते हैं.

करीब 50 हजार लोगों के पास ब्रिटिश पासपोर्ट थे जिसके आधार पर 30 हजार ब्रिटेन चले गए. बाक़ी ने अमेरिका कनाडा और भारत में शरण ली. हालांकि इसको लेकर इंग्लैंड में काफी विरोध भी हुआ. उनके वहां से जाते ही युगांडा की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई.

ईदी अमीन को दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाहों में एक माना जाता है

हालांकि एक साल पहले युगांडा के प्रेसिडेंट योवेरी मुसेवेनी ने कहा कि ईदी अमीन द्वारा भारतीयों को देश से निकालना बड़ी भूल थी. ईदी अमीन 1971 से 1979 तक युगांडा के तानाशाह थे. जो एशियाई युगांडा से निकाले गए, उनमें बड़ी संख्या में भारतीय, खासकर गुजराती उद्योगपति थे जो सौ साल से भी ज्यादा समय से वहां रह रहे थे.

भारतीयों के पास ब्रिटिश के साथ युूगांडा के पासपोर्ट होने की भी कहानी है. युगांडा 1962 में आजाद हुआ था, लिहाजा वहां से इससे पहले से रहने वाले एशियाइयों के पास युगांडा के साथ ब्रिटिश नागरिकता भी थी. जब अमीन शासनकाल में भारतीय मूल के लोगों को वहां से निष्कासित किया गया, तब भारत ने युगांडा से अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिये.

ईदी अमीन को लेकर ये अटकलें भी थीं कि वो नरभक्षी है

President of Uganda Idi Amin Dada cuts the cake as his new bride Sarah Kyolaba looks on during their wedding in August 1975 in Kampala. Idi Amin’s reign of terror lasted from 1971 when he seized power from Milton Obote, to 13 April 1979, when Tanzanian troops and exiled Ugandans stormed Kampala and removed him from power. The self-styled field marshal settled then in exile in Saudi Arabia. Throughout his presidency there were continual reports of widespread atrocities. The former despot said in February 1999 in his luxury home in the Saudi Arabian city of Jeddah that he is at peace with himself and that his only passion now is Islam and Allah. (Photo AFP/Getty Images)

रेलवे मजदूर बनकर युगांडा गए थे भारतीय

ज्यादातर भारतीय वहां युगांडा में 1896 से 1901 के बीच रेलवे के निर्माण के लिए मजदूर के रूप में वहां भेजे गए थे. इसमें से ज्यादातर लोगों ने फिर वहीं बसने का फैसला किया. वो भारत जाकर अपने परिवारों को वहां ले आए. ये लोग ज्यादातर गुजरात और पंजाब के थे. उन्होंने वहां धीरे धीरे अपनी स्थिति बेहतर कर ली थी.

कुछ समय बाद उन्होने चीनी, कॉफी और चाय उगाने में अपनी किस्मत आज़माई और उसके बाद फिर मैन्युफैक्चरिंग में. वे देश में नई तकनीक लाए, लोगों को प्रशिक्षण और काम दिया.

धीरे धीरे वे समाज का अमीर तबका बन गए. लेकिन आमीन का कहना था उन्होने युगांडा और उसके लोगों का शोषण करना शुरू कर दिया.

ईदी अमीन ने सत्ता में आते ही उन भारतीयों को देश से निकल जाने का आदेश दिया, जो वहीं पैदा हुए थे, जिनके परिवार सौ सालों से वहां रह रहे थे

सैनिक के रूप में अमीन ने शुरू किया था करियर

इदी अमीन मामूली सैनिक के रूप में 1946 में ब्रिटिश औपनिवेशिक रेजिमेंट किंग्स अफ़्रीकां राइफल्स में शामिल हो हुआ था. फिर वो सेना में तरक्की करता गया.

25 जनवरी 1971 को जब सेना ने युगांडा में सैन्य तख्तापलट द्वारा प्रधानमंत्री मिल्टन ओबोटे को पद से हटाने के दौरान वो सेना में मेजर जनरल से कमांडर बन चुका था.

जब वो देश के प्रमुख पद पर आसीन हुआ तो उसने खुद को फील्ड मार्शल के रूप में प्रोमोट कर दिया. 1977 से 1979 तक अमीन ने खुद को कई पदवियों और पदों से नवाज़ा-

जिसमें “महामहिम, आजीवन राष्ट्रपति, फील्ड मार्शल, अल हदजी डॉक्टर, ईदी अमीन दादा, वीसी, डीएसओ, एमसी,अफ्रीका व विशेष रूप से युगांडा में ब्रिटिश साम्राज्य का विजेता ” की उपाधियां शामिल थीं.

ईदी अमीन ने एक साधारण सैनिक के रूप में करियर शुरू किया लेकिन वो तेजी से ऊपर चढ़ता गया

करीब पांच लाख हत्याएं कराईं

अमीन नौ सालों तक युगांडा की सत्ता पर काबिज रहा. इस दौरान देश में जमकर दमन, उत्पीड़न और गैरकानूनी हत्याएं हुईं. देश में मानवाधिकारों के दुरूपयोग के साथ भ्रष्टाचार और आर्थिक कुप्रबंधन का भी जबरदस्त सिलसिला चला.

माना जाता है कि अमीन के शासनकाल में देशभर में पांच लाख लोग मार डाले गए. अमीन को लीबिया के मुअम्मर अल-गद्दाफी के अलावा सोवियत संघ तथा पूर्वी जर्मनी का समर्थन हासिल था. लेकिन कई देशों ने अपने राजनयिक संबंध युगांडा से खत्म कर लिये.

हैवीवेट चैंपियन बॉक्सर था

अमीन के शासनकाल असंतोष लगातार पनपता रहा. हालांकि उसने इसे बलपूर्वक दबाने की भरसक कोशिश की लेकिन तंजानिया के खिलाफ युद्ध छेड़ना उसे भारी पड़ गया. उसे देश से भागना पड़ा. पहले लीबिया और फिर सऊदी अरब ने उसे राजनीतिक शरण दी.

16 अगस्त 2003 को उसकी मृत्यु हो गई.

उसका परिवार रोमन कैथोलिक ईसाई था. बाद परिवार ने मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया था.

अपनी एक बीवी के जन्मदिन पर केक काटते हुए ईदी अमीन

जब ईदी अमीन छोटा था, तभी पिता ने उसे छोड़ दिया. ननिहाल में उसका पालन पोषण हुआ. चौथी क्लास तक पढाई के बाद उसने स्कूल छोड़ दिया था. सेना में भर्ती होने से पहले कई छोटे-मोटे काम किए.

सेना में भर्ती होने के बाद उसने तेजी से तरक्की की. वो असाधारण तौर पर लंबा और ताकतवर शरीर वाला था. वो छह फीट चार इंच का था. हैवीवेट बॉक्सिंग चैंपियन होने साथ अच्छा तैराक और रग्बी फॉरवर्ड था.

महारानी एलिजाबेथ को भेजा था प्रेम पत्र

P.M. LEVY ESHKOL WITH THE UGANDA CHIEF OF STAFF IDI AMIN AND UGANDA VICE PRESIDENT JOHN BABIIHA AFTER HIS ARRIVAL AT ENTEBBE AIRPORT.
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1976 के अंत के पास, अमीन ने खुद को “स्कॉटलैंड का बेताज बादशाह” घोषित किया. वो स्कॉटिश किल्ट (एक प्रकार का परिधान) पहन कर मेहमानों और गणमान्य लोगों का स्वागत करने लगा.

उसने रानी एलिजाबेथ द्वितीय को लिखा, ​​”मैं चाहता हूं कि आप मेरे लिए स्कॉटलैंड, आयरलैंड तथा वेल्स की यात्राओं का प्रबंध करें ताकि मैं उन क्रांतिकारी आंदोलनों के प्रमुख लोगों से मिलूं

जिन्होंने आपके साम्राज्यवादी उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई लड़ी है”. कथित रूप से उसने ब्रिटेन की महारानी को ये संदेश भी भेजा, “प्रिय लिज़, यदि तुम असली मर्द के बारे में जानना चाहती हो, तो कंपाला आओ.”

हेलीकॉप्टर में बैठकर भागा था तानाशाह अमीन

इस तरह की अफवाहें भी फैलीं कि वो नरभक्षी था.विदेशी मीडिया अक्सर उसे अजीबोगरीब शख्स के तौर पर दिखाता था. 1977 में टाइम पत्रिका के एक लेख में उसे “हत्यारा व जोकर, बड़े दिल वाला विदूषक और एक सैन्य अनुशासन में रहने वाले एक अकडू” के रूप में बताया गया.

हालांकि 1978 से अमीन के समर्थकों और सहयोगियों की संख्या में कमी आने लगी. उसके खास लोग वहां से भागकर निर्वासित जीवन जीने लगे.

इसी दौरान जब एक युगांडा में विद्रोहियों ने तंजानिया की शरण ली तो अमीन ने तंजानिया पर हमला बोला. हालांकि ये भारी साबित हुआ. तंजानिया के जवाबी हमले के बाद उसे हेलीकॉप्टर पर बैठकर देश से भागना पड़ा.

अपनी बीवियों के साथ ईदी अमीन, जब वो युगांडा का राष्ट्रपति था (फाइल फोटो)

ईदी अमीन 1980 तक लीबिया में रहा, फिर वो सऊदी अरब में बस गया. हालांकि उसके लिए उसने अच्छा खासा भुगतान किया.

हालांकि उसने अपने शासन के तौर-तरीकों पर कभी पछतावा जाहिर नहीं किया. उसने एक बार युगांडा वापस लौटने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाया.

छह बीवियां, कई रखैल और 45 बच्चे

ईदी अमीन ने कम से कम छह महिलाओं से विवाह किया. तीन को तलाक दे दिया. माना जाता है कि उसकी सभी बीवियां खूबसूरत थीं. कहा जाता है कि उसने अपनी एक पत्नी की हत्या करा दी तो एक अन्य पत्नी के पूर्व प्रेमी को गायब करा दिया.

उसके एक नौकर ने एक बार युगांडा में भारतीय उच्चायुक्त को बताया था कि वह उस प्रेमी के कटे सिर को एक खूफिया कमरे में फ्रिज में रखता था. जब उसकी पत्नी के अपने प्रेमी के कटे सिर को देखा तो वह बेहोश हो गई थी.

जब वो लीबिया में निर्वासित हुआ तो उसने आभार स्वरूप मुअम्मर अल-गद्दाफी की बेटी आयशा से शादी की लेकिन बाद में तलाक हो गया. 1993 तक अमीन अपने आखिरी नौ बच्चों और एक पत्नी मामा ए चुमारू के साथ रह रहा था.

माना जाता है कि उसके 30 से 45 बच्चे थे. उसके कुछ बच्चे युगांडा में काफी अच्छी स्थिति और पदों पर हैं. द मॉनिटर के अनुसार, 2003 में अपनी मौत से कुछ महीने पहले ही अमीन ने एक और शादी की थी. ये भी कहा जाता है कि शादी के अलावा उसके कई रखैल भी थीं.

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खुद से 20 साल छोटी इस अभिनेत्री पर फिदा हुए थे नाना पाटेकर, पत्नी से आ गई थी तलाक की नौबत

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जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं, कि बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में नाना पाटेकर एक बहुत ही माने हुए कलाकार हैं। नाना पाटेकर के अभिनय के बहुत दर्शक फैन है। हाल ही में यह अभिनेता तनुश्री दत्ता के साथ विवाद को लेकर चर्चाओं में रहे थे।

आपको बता दें कि 68 साल के नाना पाटेकर ने बॉलीवुड में अपना सफर करियर 1978 में फिल्म गमन से शुरू किया था।

उसके बाद साल 1996 में नाना पाटेकर ने फिल्म अग्निसाक्षी में अभिनेता जैकी श्रॉफ और अभिनेत्री मनीषा कोइराला के साथ काम किया था। इस दौरान नाना पाटेकर अभिनेत्री मनीषा कोइराला को पसंद करने लग गए थे।

इन दोनों के अफेयर की खबर बहुत ज्यादा वायरल होने लगी थी। हर कोई इसी असमंजस में था कि नाना पाटेकर जैसे कठोर स्वभाव वाले व्यक्ति भी प्यार कर सकते हैं।

दूसरी तरफ अभिनेत्री मनीषा कोइराला भी नाना पाटेकर को लेकर बहुत ज्यादा संजीदा थी. आपको बता दें, कि इस अभिनेत्री को नाना पाटेकर का किसी और के साथ बात करना भी पसंद नहीं था।

एक बार मनीषा कोइराला ने नाना पाटेकर को अभिनेत्री आयशा जुल्का के साथ देख लिया, जिसके बाद वह बहुत ज्यादा गुस्सा हो गई थी और दोनों के बीच हाथापाई होने की नौबत आ चुकी थी, लेकिन नाना पाटेकर ने जैसे तैसे करके मामले को सुलझाया।

हालांकि, दोनों के रिलेशन में उस वक्त दरार आ गई, जब मनीषा ने नाना पाटेकर को आयशा जुल्का के साथ बंद कमरे में रंगे हाथ पकड़ लिया था. बात इतनी बढ़ गई कि नौबत मारपीट तक जा पहुंची थी.

इस दौरान मनीषा ने आएशा झुलका को काफी खरी-खोटी तक सुनाई थी. बता दें कि नाना और मनीषा फिल्म ‘अग्निसाक्षी’ के दौरान करीब आए थे. नाना और मनीषा ने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘खामोशी : द म्यूजिकल’ में भी साथ काम किया.

इस फिल्म में नाना ने मनीषा के पिता का रोल निभाया था. फिल्म के दौरान दोनों ने अपनी रिलेशनशिप को पब्लिकली एक्सेप्ट कर लिया था. नाना पाटेकर मनीषा को लेकर काफी पजेसिव थे.

नाना को मनीषा किसी भी पब्लिक गैदरिंग या पार्टी में जाना पसंद नहीं थी.

इसके अलावा मनीषा का रिवीलिंग ड्रेस पहननें और दूसरे शख्स से बातचीत करने पर भी नाना को आपत्ती थी. हालांकि, आयशा के कारण नाना

और मनीषा के बीच पहले ही दरार आ चुकी थी. इस बीच मनीषा नाना से उनकी पत्नी (नीलकांति) को तलाक देकर शादी करने का दबाव बना रही थी.

नाना अपनी पत्नी को तलाक देने के मूड में भी नहीं थे. फाइनली मनीषा ने नाना की लाइफ से दूर होने का फैसला कर लिया.एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने कहा था- वो मनीषा को आज भी काफी मिस करते हैं.

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लोकसभा चुनाव 2019 में मध्यप्रदेश के ज्योतिष प्रोफ़ेसर ने की थी ये भविष्यवाणी

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लोकसभा चुनाव 2019 में सभी सातों चरणों के मतदान खत्म होने के बाद चुनाव नतीजों की भविष्यवाणी करने वाले उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी के एक लेक्चरर को मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने सस्पेंड कर दिया है।

उन्हें यह कहते हुए सस्पेंड किया गया कि उन्होंने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है। लेक्चरर राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर ने भविष्यवाणी की थी कि बीजेपी की बंपर जीत होगी उसे फेसबुक पर पोस्ट कर दिया था। उनके अनुसार बीजेपी के पक्ष को 2014 लोकसभा चुनाव से इस चुनाव में ज्यादा सीटें मिलेंगी।

लेक्चरर ने अनुमान लगाया था कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 300 सीटें मिलेंगी और एनडीए को 300 अधिक सीटें मिलेंगी। ऐसा कहने पर उनको सस्पेंड कर दिया गया।

उसके बाद मीडिया से बात करते हुए लेक्चरर राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर कहा कि चूंकि ज्योतिष संभावनाओं का शास्त्र है। ऐसे ही छात्रों के बीच बैठकर चुनाव के विषय में संभावनाएं खोजी जा रही थी तो समय की कुंडली के आधार पर कुछ फलादेश किया गया होगा।

चूंकि मेरा मोबाइल और पीसी खुला रहता है तो किसी उत्साही छात्र ने फेसबुक पर लिख दिया।

परंतु ऐसा नहीं लिखा गया था कि किसी पार्टी के पक्ष में किसी को वोट देने के लिए कहा गया हो कि इनको वोट दो, इनको वोट नहीं दो। उन्होंने कहा कि परंतु शासन ने कार्रवाई की है वह सिरोधार्य है। परंतु मैं निरपराध हूं।

उनके चुनावी अनुमान के बाद उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। लेक्चरर पर राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के तहत कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। लेक्चरर मुसलगांवकर संस्कृत वेद जोतिर्विज्ञान विभाग के हेड हैं।

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जानिए कितने सटीक थे 2014 लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल, आंकड़े जानकर होंगे हैरान

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लोकसभा चुनाव 2019 के आखिरी चरण की वोटिंग आज यानी रविवार शाम छह बजे खत्म हो जाएगी। इसके बाद फिर सबके मन में एक ही सवाल होगा कि आखिर सरकार किसकी बनेगी,

क्या मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आएगी या विपक्ष को मौका मिलेगा या फिर सियासी गुना-गणित से तीसरे मोर्चे की संभवना बनेगी. इसे लेकर सबकी नजरें एग्जिट पोल पर रहेंगी।

आज शाम जैसे ही आखिरी चरण की वोटिंग खत्म होगी, न्यूज चैनलों पर एग्जिट पोल आ जाएंगे और इससे एक तरह से संकेत मिलने शुरू हो जाएंगे। जब तक औपचारिक नतीजे नहीं आ जाते, तब तक अनुमानों पर चर्चा जारी रहेगी।

मगर सबसे बड़ा सवाल है कि नतीजों से पहले जिस एग्जिट पोल पर लोगों की नजरें होती हैं, क्या वे एग्जिट पोल वाकई में सही साबित होते हैं? क्या सच में ये औपचारिक नतीजों के लिहाज से सटिक होते हैं?

इन सवालों को समझने के लिए चलिए हम जानते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव यानी 2014 लोकसभा के नतीजे कैसे थे और कितने सटीक साबित हुए थे चुनावी एग्जिट पोल।

2014 के लोकसभा चुनाव में अलग टीवी चैनलों और एजेंसियों ने एग्जिट पोल में अलग-अलग आंकड़े प्रस्तुत किए थे। एक झलक 2014 लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल पर…

टाइम्स नाउ+org ने एनडीए को 249 सीटों का अनुमान दिखाया था। वहीं कांग्रेस को 148 और अन्य के खाते में 146 सीटों के आंकड़ें दिए थे।

Lok Sabha Elections Exit Poll 2019: आज आएगा एग्जिट पोल, जानें क्या है प्री, पोस्ट और एग्जिट पोल में अंतर

-इंडिया टुडे+CICERO के एग्जिट पोल में एनडीए को बहुमत मिलता बताया गया था। इंडिया टुडे ने अपने एग्जिट पोल में एनडीओ को 261 से 283 सीटें दी थी। वहीं कांग्रेस को 110 से 120 और अन्य को 150 से 162 सीटें दिखाई थी।

-एबीपी न्यूज नील्सन ने अपने एग्जिट पोल में एएनडीए को 281 सीटें दी थी। कांग्रेस को 97 और अन्य को 165 सीटें।
सीएनएन-आईबीएन सीएसडीएस ने एनडीए के लिए 270-282 सीटों का अनुमान दिया था। कांग्रेस को 92 से 102 सीटें दी थी तो अनेय को 159 से 181 सीटें।

-इंडिया टीवी+सी वोटर के एग्जिट पोल में एनडीए को 289 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। यूपीए को 101 सीटें दी गई थीं। वहीं अन्य के खाते में 153 सीटें का अनुमान दिखाया गया था।

-न्यूज 24 + चाणक्य ने बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें दी थी। इसने अपने एग्जिट पोल में एनडीए का आंकड़ा 340 पार बताया था। वहीं कांग्रेस को 70 प्लस सीटें दी थी। वहीं अन्य के खाते में 130 प्लस सीटों का अनुमान लगाया गया था।

2014 लोकसभा चुनाव के क्या रहे थे नतीजे:

2014 के लोकसभा चुनाव में एग्जिट पोल के आस-पास ही परिणाम रहे थे। 2014 लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड बहुमत से बीजेपी सत्ता में आई थी।

2014 में कुल 543 सीटों के लिए हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 282 सीटें जीत कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था। भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 336 सीटें प्राप्त हुई थीं।

वहीं यूपीए को 60 सीटें मिले थे। भाजपा ने 428 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 282 सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं कांग्रेस ने 464 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और उन्हें महज 44 सीटों पर ही जीत हासिल हो पाई थी।

एग्जिट पोल बनाम आधिकारिक नतीजे:

अगर एग्जिट पोल के आंकड़ों और फाइनल नतीजों का तुलनात्मक अध्ययन करें तो हम पाते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में लगभग सभी एग्जिट पोल में बीजेपी को बहुमत के करीब दिखाया गया था।

एग्जिट पोल के नतीजों से ही स्पष्ट हो गया था कि 2014 में केंद्र में सरकार बदलेगी और एनडीए की सरकार बनेगी। औपचारिक नतीजे आने के बाद ऐसा हुआ भी और केंद्र में मोदी सरकार आई। एग्जिट पोल में सरकार बदलने के संकेत तो मिल ही गए थे,

मगर सबसे ज्यादा सटिक आंकड़े न्यूज 24-चाणक्य के थे, जिसने बीजेपी और एनडीए को जितनी सीटों का अनुमान दिया था,

फाइनल नतीजे आने के बाद काफी मैच कर गए थे। मगर प्राय: एग्जिट पोल सटिक साबित नहीं होते हैं। इसलिए एग्जिट पोल बस एक तरह का अनुमान देता है, फाइनल नतीजे नहीं।

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अगर रहा यही हाल तो 2030 तक धरती पर नहीं बचेंगे ये 5 देश … चौथे देश का नाम है चौकाने वाला

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देश जो धरती से गायब हो सकते हैं
देश जो धरती से गायब हो सकते हैं – दुनिया का इतिहास अप्रत्याशित घटनाओं से भरा हुआ है.

आज धरती पर हर जगह राष्ट्र राज्य मौजूद हैं पर ऐसा हमेशा से नहीं रहा है. अभी कुछ शताब्दी पहले ही यह विश्व राजसत्ताओं का विश्व था लेकिन अचानक फ्रांस की क्रांति होती है और सारे विश्व में राष्ट्र राज्यों का उदय होने लगता है.

अगर इन देशों को उदय अचानक हो सकता है तो इस बात पर आशच्रय नहीं होना चाहिए की भविष्य कभी अचानक कोई देश खत्म भी हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले 20 सालों में ये देश जो धरती से गायब हो सकते हैं.

आइए जानते हैं वो देश जो धरती से गायब हो सकते हैं –

देश जो धरती से गायब हो सकते हैं –

1. स्पेन-

पिछले 600 साल से स्पेन एक मजबूत देश के रुप में इस धरती पर मौजूद है पर अगले 20 साल में शायद स्पेन नाम का देश खत्म हो जाए. इसकी वजह इस देश की विकट आर्थिक समस्याएं और अलगावादी आंदोलन हैं.

स्पेन के दो क्षेत्र बास्क और कैटेलोनिया लंबे समय से स्वयत्ता की मांग कर रहें हैं और इनका अंतिम ध्येय एक स्वायत्त राज्य बनना है. गौरतलब है कि स्पेन का दूसरा सबसे बड़ा शहर बार्सिलोना कैटेलोनिया में ही पड़ता है.

देश जो धरती से गायब हो सकते हैं

2. उत्तर कोरिया-

उत्तर कोरिया एक पूरी तरह से बंद आर्थिक व्यवस्था वाला देश है जो तानाशाही शासन के आधीन है.

पर ऐसा अनुमान है कि अगले 20 साल में इस देश की सीमाओं में इतने संसाधन नहीं बच पाएं गे जिससे इसका पालन हो सके औऱ मजबूरी में तानाशाह किम जोंग उल को सत्ता पर से अपनी पकड़ ढ़ीली करनी पड़ेगी.

तकनीकी क्षेत्र में पिछड़ चुके इस देश को चीन औऱ अन्य देशों के लिए अपनी सीमाएं खोलनी होंगी और ऐसे में बाजार की शक्तियों के आगे किम जोंग उल की तरह की शासन व्यवस्था पूरी तरह से धाराशायी हो जाएगी.

देश जो धरती से गायब हो सकते हैं

3. मालदीव–

ग्लोबल वार्मिंग के कारण इस द्वीप देश के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है. समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण ऐसा अनुमान है कि मालदीव जल्द ही जलमग्न हो जाएगा.

इस देश के राष्ट्रपति पड़ोस के दक्षिण एशियाई देशों में जमीन भी खरीद रहें हैं ताकि जब कभी भी उनका देश डूबने लगे तो अपने लोगों को वे इन देशो में बसा सकें.

देश जो धरती से गायब हो सकते हैं

4. चीन-

आपको विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश चीन का नाम इस लिस्ट में देखकर आश्चर्य हो सकता है पर जानकारों का मानना है कि जीन का विकास ही इसे ले डूबेगा.

चीन हजारों साल पुराना देश है लेकिन पिछले 2 दशकों में जिस रफ्तार से विकास के नाम पर प्रकृति का अंधाधुंध शोषण यहां किया गया है उसके कारण जल्द ही इस विशाल देश में असंतोष फूट पड़ेगा.

चीन की आधा से अधिक नदियां बूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है. स्मॉग के कारण इस देश में हर साल 2.5 लाख लोगों की जान चली जाती है.

सर्दियों के दिनों में बीजिंग जैसे शहरों में प्रदूषण इतना बढ़ जाता है सरकार को अपने नागरिकों को घरों में रहने की ही चेतावनी जारी करना पड़ती है.

अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ इस देश में बड़ा विद्रोह खड़ा हो सकता है.

देश जो धरती से गायब हो सकते हैं

5. इराक-

इस देश के कई बड़े भूभाग व्यवहारिक रुप से पहले ही एक दूसरे से अलग थलग हो चुके हैं. आईएसआईएस जिहादियों का देश के पश्चिमी हिस्सों पर कब्जा है जबकि कुर्दों का उत्तरी हिस्से पर.

इश तरह से इराक सरकार के प्रभाव सिर्फ दक्षिणी हिस्से तक ही सीमित है. ऐसा अनुमान है कि यह देश अब फिर कभी एक नहीं हो पाएगा.

देश जो धरती से गायब हो सकते हैं

ये है वो देश जो धरती से गायब हो सकते हैं – विशेषज्ञों की भविष्यवाणी के अनुसार 2030 तक ऐसे कई देश हैं जो समाप्त हो सकते हैं वहीं कुछ नए देशों का उदय भी हो सकता है.

इसमें सबसे चौंकाने वाला देश है आईएसआईएस. आज यह भले ही एक आतंकी संगठन है पर जितने बड़े भूभाग पर इस संगठन का कब्जा है

उसे देखते हुए इस बात पर आश्चर्य नहीं करना चाहिए की आने वाले कुठ सालों में यह अंतराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त देश बन सकता है

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वर्ल्ड कप से पहले देखें टीम इंडिया के सबसे बड़े खिलाडियों की फिटनेस … जाने क्या लेते है ये खाने में डाईट

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जायकेदार और स्वादिष्ट खाना कई बार आपकी फिटनेस का दुश्मन बन जाता है. इससे शरीर में कैलोरी की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है और शारीरिक फुर्तीलापन कम होने लगता है.

लेकिन आप चाहें तो इसे फिजिकल वर्कआउट के जरिए कंट्रोल कर सकते हैं. विश्व कप खेलने जा रही टीम इंडिया के खिलाड़ी इसकी मिसाल हैं.

इन क्रिकेटर्स की डाइट में अंडे, दूध और चिकन शामिल हैं. इसके बावजूद ये दुनिया के सबसे फिट खिलाड़ियों में गिने जाते हैं.

चिकन-अंडे बिना नहीं रहते ये खिलाड़ी, WC से पहले देखें इनकी फिटनेस

एमएस धोनी- पूर्व कप्तान एमएस धोनी टीम के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं. इसके बावजूद विकेट के पीछे उनकी फुर्ती जगजाहिर है. धोनी भी रोजाना वर्कआउट करते हैं और जमकर पसीना बहाते हैं.

वह रोजाना करीब 4 लीटर दूध पीते हैं. वैसे तो धोनी एक हेल्दी डाइट चार्ट को फॉलो करते हैं, लेकिन उनकी फेवरेट डिश में बटर चिकन, चिकन टिक्का, पीजा और खीर भी शामिल है. इस खाने से मिलने वाली कैलोरी को बर्न करने के लिए धोनी नियमित रूप से व्यायाम करते हैं।

चिकन-अंडे बिना नहीं रहते ये खिलाड़ी, WC से पहले देखें इनकी फिटनेस

रोहित शर्मा-हिटमैन के नाम से मशहूर ओपनर बल्लेबाज रोहित शर्मा शुद्ध शाकाहारी हैं. इसके बावजूद वह शरीर में ताकत के लिए रोजाना एक दर्जन से ज्यादा अंडे खाते हैं.

आलू का पराठा उन्हें काफी पसंद है. रोहित कभी कसरत से मन नहीं चुराते और जमकर वर्कआउट करते हैं.

चिकन-अंडे बिना नहीं रहते ये खिलाड़ी, WC से पहले देखें इनकी फिटनेस

विराट कोहली-टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली के फिटनेस का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है. कोहली खुद को फिट रखने के लिए न सिर्फ हेल्दी डाइट चार्ट फॉलो करते हैं,

बल्कि जिम में रेगुलर वर्कआउट भी करते हैं. कोहली ब्रेकफास्ट में रोजाना ऑमलेट, पालक, अंडे और सालमन फिश जैसी चीजें खाते हैं.

चिकन-अंडे बिना नहीं रहते ये खिलाड़ी, WC से पहले देखें इनकी फिटनेस

हार्दिक पांड्या- टीम इंडिया के धांसू ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या का शरीर बेशक दुबला-पतला है, लेकिन गेंद पर किया हुआ प्रहार उनकी ताकत को बयां करता है.

हार्दिक पांड्या की डाइट में अंडों के अलावा प्रोटीनयुक्त खाना रहता है. पांड्या अपने सिक्स पैक एब्स को लेकर भी काफी मशहूर हैं.

चिकन-अंडे बिना नहीं रहते ये खिलाड़ी, WC से पहले देखें इनकी फिटनेस

शिखर धवन-टीम इंडिया के गब्बर यानी शिखर धवन भी नॉन वेजिटेरियन हैं. तंदूरी चिकन और फ्राई फिश शिखर धवन की फेवरेट डिश हैं.

शिखर सप्ताह में सिर्फ तीन या चार दिन वर्कआउट करते हैं. वह जिम में पावरलिफ्टिंग, सिट अप्स, मोबिलिटी ट्रेनिंग, कार्डियो सेशन और डेड लिफ्ट करते हैं

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अगर भाजपा को नही मिला बहुमत तो PM पद के लिए अब इस नेता को आगे कर सकता है संघ

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इस बार के लोकसभा चुनाव बेहद खास होने जा रहे हैं। इसकी वजह है मोदी लहर का फीका पड़ना और अखिलेश मायावती का यूपी में गठबंधन और कांग्रेस का मजबूत होना।

इस बार के चुनाव एकतरफा नहीं होने वाले हैं। बहुमत न मिला तो पीएम मोदी की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है।

आइए जानें वो कौन है जिसको इस बार संघ पीएम पद के लिए आगे कर सकता है और इसकी वजह क्या है।

बहुमत न मिला को मोदी के नाम पर सहमति मुश्किल

भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर से 2014 जैसी जीत दोहराना चाह रही है। हालांकि ये इस बार इतना आसान नहीं होगा।

जिस तरह से सत्ता के समीकरण बन रहे हैं। उससे बीजेपी को नुकसान होना तय है। बहुमत मिला तब तो मोदी का दोबारा पीएम बनना तय है

लेकिन बहुमत न मिलने की सूरत में दूसरे दलों से सहयोग लेने के लिए मोदी के नाम पर सहमति बनान बेहद मुश्किल होगा।

गडकरी का नाम चल रहा है मोदी के विकल्प के रूप में

मोदी के विकल्प के रूप में नितिन गडकरी का नाम आगे चल रहा है। इसकी वजह है उनकी स्वीकार्यता जो अन्य दलों में भी है।

कांग्रेस भी उनके नाम पर सहमति दे सकती है। वहीं टीएमसी, टीआरएस से लेकर शिवसेना से भी गडकरी के नाम पर सहमति आसान होगी।

बस गडकरी के पक्ष में जो नकारात्मक बाते हैं वो पूर्ति घोटाले में घिरना और उनका बिना सोचे समझे बोलना, जो संघ को चिंता में डाल सकता है।

ये नेता मार सकता है मोदी और गडकरी दोनों से बाजी

इस वजह से गडकरी इस दौड़ में पिछड़ सकते हैं। जो नेता इन दोनों से आगे निकल सकता है वो हैं राजनाथ सिंह।

बेदाग छवि, संतुलित बातचीत और लंबे अनुभव के साथ ही संघ का स्वयंसेवक उनको इस बार संघ की पसंद बना सकता है।

हैरानी की बात है कि संघ के साथ होते हुए भी मुस्लिम तक उनके नाम पर बिदकते नहीं हैं।

उनकी छवि अल्पसंख्यकों में भी स्वीकार्य है। भाजपा का अध्यक्ष रहने के साथ यूपी के सीएम रह चुके राजनाथ की इन खूबियों की वजह से संघ इस बार उनको आगे कर सकता है।

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देश की 543 लोकसभा सीटों में से 543 का सर्वे आया सामने, इस पार्टी का होगा सूपड़ा साफ़

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Exit Polls के रुझान जल्‍द ही आने लगे हैं। इससे अनुमान लग रहा है कि किस पार्टी को कितनी बढ़त मिल रही है। Lok Sabha Election 2019 के तहत सातवें चरण के मतदान में 60 फीसद से ज्‍यादा मतदान हुआ है।

इसके साथ ही करीब डेढ़ महीने से चली आ रही चुनावी प्रक्रिया पर विराम लग गया है। मतदान खत्म होते ही Exit Polls के रुझान आने शुरू हो गए।

बता दें कि चुनाव परिणाम तो 23 मई को ही आएंगे, लेकिन Exit Polls से भावी सरकार की एक तस्वीर तो बनती दिखती ही है…

Lok Sabha Exit Polls 2019 Live Update:

INDIA TODAY-MY AXIS के अनुसार, राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी 25 में से 23 सीट जीत सकती है। वहीं, कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।

– INDIA TODAY-MY AXIS के सर्वे के मुताबिक, कुल 542 सीटों में से 123 पर रुझान आ चुके हैं। यहां यूपीए को 53 एनडीए को 29 और अन्‍य को 41 सीटें मिलती नजर आ रही हैं।

– C-Voter के मुताबिक, लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए को 287, यूपीए को 128 और अन्‍य को 87 सीटें मिलती नजर आ रही हैं। हालांकि, यहां भी एनडीए सरकार बनाती नजर आ रही है। कांग्रेस के दावे यहां भी फीके पड़ते दिख रहे हैं।

– एबीपी न्यूज-नील्सन के सर्वे में उत्तर प्रदेश में महागठबंधन भारी बढ़त बनाता दिख रहा है और भारतीय जनता पार्टी को झटका लग रहा है। उत्‍तर प्रदेश में इस बार बसपा और सपा एक साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरे हैं।

– महाराष्‍ट्र में एनडीए को एग्जिट पोल में नुकसान होता दिख रहा है। 48 लोकसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में एडीए ने पिछली बार 42 सीटें जीती थीं और यूपीए को 6 सीटें मिली थीं।

हालांकि, इस बार टाइम्स नाउ एग्जिट पोल के मुताबिक NDA को 38 सीटों (-4) से ही संतोष करना पड़ सकता है, जबकि यही नुकसान UPA में बढ़त के तौर पर जुड़कर उसकी सीटों की संख्या 10 तक (+4) पहुंचा सकता है।

– टाइम्स नाउ और वीएमआर के सर्वे के मुताबिक, 29 सीटों वाले मध्य प्रदेश में 2014 में बीजेपी को 27 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं।

इस बार राज्य की सत्ता भले ही कांग्रेस को मिल गई हो पर वह लोकसभा चुनावों में बीजेपी का ज्यादा नुकसान नहीं कर सकी है। टाइम्स नाउ की मानें तो इस बार BJP को 21 और कांग्रेस को 8 सीटें मिल सकती हैं।

– बिहार में टाइम्स नाउ वीएमआर के मुताबिक, 40 सीटों वाले बिहार में NDA की सीटें घट सकती हैं। यहां कांग्रेस की अगुआई वाले UPA को पिछले चुनाव की तुलना में सीधे तौर पर 5 सीटों का फायदा होता दिख रहा है।

42.78 फीसदी वोटों के साथ कांग्रेस+ को 15 सीटें मिल सकती हैं, जबकि 2.98 फीसद वोट शेयरों की कमी के साथ (48.52%) BJP+ को 25 सीटें मिल सकती हैं।

– यूपीए को 132 सीटें मिलने का दावा टाइम्‍स नॉउ और वीएमआर के रूझानों में किया जा रहा है।

– टाइम्‍स नॉउ और वीएमआर के रूझानों में एनडीए को पूर्ण बहुमत मिलता नजर आ रहा है। इस सर्वे में 306 सीटें मिलने का दावा किया जा रहा है। रुझानों में अन्‍य को 104 सीटें मिलने का दावा किया है।

– पिछले लोकसभा चुनाव में अधिकतर एग्जिट पोल में दावा किया गया था कि एनडीए, 10 साल से सत्तारूढ़ कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने में सफल होगी।

हालांकि एक एजेंसी के अलावा किसी ने बीजेपी की इतनी बड़ी जीत का दावा नहीं किया था। उस वक्त एग्जिट पोल में कांग्रेस को करीब 100 सीट मिलने का दावा किया गया था, लेकिन कांग्रेस 44 पर सिमट गई।

वहीं बीजेपी को अनुमान से परे 282 और एनडीए को 336 सीटें मिलीं थीं। बता दें एजेंसी ने बीजेपी को 291 और एनडीए को 340 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था।

– एग्जिट पोल के रिजल्ट और वोटिंग के असली रिजल्ट कभी कभी समानांतर चलते हैं तो कभी बिल्कुल अलग हो जाते हैं। तमिलनाडु चुनाव 2015, बिहार विधानसभा 2015 में यग गलत साबित हुए थे।

वहीं साल 2004 लोकसभा चुनाव में सभी एग्जिट पोल फेल हुए और कांग्रेस ने सरकार बनाई। उसके बाद साल 2014 में सही साबित हुए, क्योंकि लोक सभा चुनाव में मोदी लहर का अनुमान एग्जिट पोल्स में दिखा था।

– जागरण डॉट कॉम के साथ खास बातचीत में C-Voter के यशवंत देशमुख ने एग्जिट पोल करवाने और उसकी सत्यता को लेकर बातचीत की।

उन्होंने एग्जिट पोल, उसके सैंपलर साइज, सीटों के निर्धारण को लेकर बात की।ज्यादा से ज्यादा लोग तक पहुंचना हमारा उद्देश्य होता है।

साढे पांच लाख से अधिक मतदाताओं से बात करके देश का रुझान तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि सटीक रुझान हासिल करने के लिए हर वर्ग के आधार पर साक्षात्कार किए जाते हैं।

– चुनावी सर्वे से होकर ही एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आते हैं। एग्जिट पोल में एक सर्वे के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि आखिर चुनाव परिणाम किसके पक्ष में आ रहे हैं।

एग्जिट पोल हमेशा वोटिंग पूरी होने के बाद ही दिखाए जाते हैं। इसका मतलब यह है कि सभी चरण के चुनाव होने के बाद ही इसके आंकड़े दिखाए जाते हैं।

ऐसा नहीं है कि हर चरण के बाद एक्जिट पोल दिखा दिया जाए। वोटिंग के दिन जब मतदाता वोट डालकर निकल रहा होता है, तब उससे पूछा जाता है कि उसने किसे वोट दिया।

इस आधार पर किए गए सर्वेक्षण से जो व्यापक नतीजे निकाले जाते हैं, इसे ही एग्जिट पोल कहते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 फरवरी 1967 को पहली बार नीदरलैंड में इसका इस्तेमाल किया था।

– ऐसा रहा चरण वार मतप्रतिशत

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 69.50 फीसद मतदान हुआ, जबकि दूसरे चरण में 69.44 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

तीसरे चरण में 68.40 फीसद वोटर मतदान केंद्रों तक पहुंचे और चौथे चरण में 65.51 लोगों ने मतदान किया। पांचवें चरण में 64.21 फीसद लोगों ने मताधिकार का इस्तेमाल किया जबकि छठे चरण में 63.48 फीसद मतदान हुआ।

– सातवें चरण का मतदान – 19 मई

आखिरी चरण में 19 मई को आठ राज्यों की 59 लोकसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। मतदान के अंतिम चरण में कुल 918 उम्मीदवार चुनाव मैदान में।

आखिरी चरण में पंजाब और उत्तर प्रदेश की 13-13, पश्चिम बंगाल की नौ, बिहार व मध्य प्रदेश की आठ-आठ, हिमाचल की चार, झारखंड की तीन और चंडीगढ़ की इकलौती सीट पर मतदान हो रहा है।

– छठे चरण का मतदान – 12 मई

लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 12 मई को राजधानी दिल्ली की सभी सात सीटों समेत सात राज्यों की 59 लोकसभा सीटों के लिए 63.48 फीसद मतदान हुआ।

दिल्ली में 60.21 फीसद वोटिंग हुई। हालांकि, पिछली बार यहां 65 फीसद मतदान हुआ था।

हिंसा के बीच इस चरण में भी सबसे ज्यादा मतदान पश्चिम बंगाल में हुआ। छठे चरण के मतदान के साथ ही लोकसभा की 543 सीटों में से 483 सीटों के लिए मतदान खत्म हो गया।

– पांचवें चरण का मतदान – 6 मई

बंगाल में हिंसा की घटनाओं के बीच सबसे ज्यादा वोटिंग हुई। सात राज्यों की 51 सीटों पर औसत 62.5 फीसद मतदान हुआ। बंगाल में इस चरण में भी लगभग 74 फीसद वोट पड़े।

मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड में भी अच्छा मतदान हुआ। वहीं बिहार व उत्तर प्रदेश में कुछ कम वोट पड़े। जम्मू-कश्मीर में लद्दाख सीट केलिए 64 फीसद मतदान हुआ।

पांचवें चरण का मतदान खत्म होने के साथ ही लोकसभा की 543 सीटों में से 424 सीटों पर चुनाव संपन्न हो गया।

– चौथे चरण का मतदान – 29 अप्रैल

लोकसभा चुनाव 2019 के चौथे चरण के लिए नौ राज्यों की 72 संसदीय सीटों पर वोटिंग हुई। चुनाव आयोग के अनुसार, चौथे चरण में 64 फीसदी मतदान हुआ।

पश्चिम बंगाल में सबसे ज्‍यादा 66.46 फीसद मतदान दर्ज किया गया। महाराष्ट्र की 17, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की 13-13, पश्चिम बंगाल की आठ, मध्य प्रदेश और ओडिशा की 6-6, बिहार की 5

और झारखंड की 3 सीटों पर मतदान हुआ। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग लोकसभा सीट पर भी मतदान हुआ। अनंतनाग सीट पर तीन चरणों में मतदान कराया गया।

– तीसरे चरण का मतदान – 23 अप्रैल

लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में 23 अप्रैल को 13 राज्यों व दो केंद्र शासित प्रदेशों की 117 सीटों के लिए लगभग 66 फीसद वोट पड़े।

पश्चिम बंगाल में कई जगह भारी हिंसा के बीच सर्वाधिक 80 फीसद मतदान दर्ज किया गया था। तीसरे चरण में मुर्शिदाबाद के बालीग्राम में बूथ के बाहर दो गुटों में भिड़ंत हो गई, जिसमें मतदान कर वापस लौट रहे तियारुल शेख की मौत हो गई।

– दूसरे चरण का मतदान – 19 अप्रैल

दूसरे चरण में एक केंद्र शासित प्रदेश सहित कुल 12 राज्यों की 95 लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ। इस चरण में 66 फीसद मतदान दर्ज किया गया।

दूसरे चरण में लोकसभा की 97 सीटों पर चुनाव होने थे,

लेकिन तमिलनाडु की वेल्लोर सीट पर बड़े पैमाने पर नकदी जब्त होने के बाद यहां का चुनाव रद कर दिया गया था। उधर, कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति को देखते हुए त्रिपुरा पूर्व सीट का चुनाव स्थगित कर दिया गया।

– पहले चरण का मतदान – 11 अप्रैल

18 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटों पर हुआ मतदान। आंध्र प्रदेश में हिंसा के कारण तीन लोगों की मौत।

कुल 14 करोड़ मतदाताओं में से इस चरण में 58 से 60 फीसद ने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

– चुनाव आयोग ने एग्जिट पोल्स के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसके मुताबिक चुनाव खत्म होने के आधे घंटे बाद ही एग्जिट पोल्स जारी किए जा सकते हैं।

– एग्जिट पोल एक तरह का सर्वे होता है जिसे कुछ कंपनियां और संस्थान मिलकर कराते हैं। वोट देकर निकलने के ठीक बाद मतदाताओं से पूछा जाता है कि उन्होंने किसे वोट दिया।

– 11 अप्रैल से शुरू हुआ मतदान 19 अप्रैल तक 7 चरणों में हुआ।

– एग्जिट पोल सीधे तौर पर संकेत देते हैं कि अगली सरकार किसकी होने वाली है। हालांकि, ये जरूरी नहीं कि एग्जिट पोल ठीक ही हों कई बार ये गलत भी साबित हुए हैं।

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इस खास गुफा में PM मोदी कर रहे हैं ध्यान, इन आधुनिक सुविधाओं से है लैस… जाने कितना है किराया ?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदारनाथ के दर्शन किए। इस दौरान उन्‍होंने अभिषेक के साथ पूजा-अर्चना की।

इसके बाद पीएम मोदी सेफ हाउस में विश्राम के उपरांत बारिश के बीच पैदल चलकर रुद्र गुफा पहुंचे। यहां पीएम मोदी कल सुबह तक ध्यान करने वाले हैं।

वे रात्रि विश्राम भी इसी गुफा में ही विश्राम करेंगे। इस गुफा का हाल ही निर्माण हुआ है। इसे पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है। आइए हम आपको बताते हैं इस गुफा से जुड़ी अहम बातें…

मोदी रुद्र गुफा में रुकने वाले दूसरे मेहमान

केदारनाथ धाम में रुद्र गुफा पिछले साल बनकर तैयार हुई थी। जिसका संचालन इस साल से विधिवत शुरू हो गया।

इस साल महाराष्ट्र के जय शाह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रुद्र गुफा में रुकने वाले दूसरे मेहमान हैं। यह गुफा प्राकृतिक नहीं है, भूमिगत है। इस गुफा की ऊंचाई लगभग सवा 12 हजार फीट है।

प्राकृतिक सुंदरता से घिरी इस गुफा में टॉयलेट, बिजली और टेलीफोन जैसी आधुनिक सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है। इस गुफा की देख रेख की जिम्मेदारी गढ़वाल मंडल विकास निगम की है।

ये गुफा पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट थी

केदारनाथ मंदिर से 2 किलोमीटर दूर मंदाकिनी नदी के दूसरी तरफ बनी ये गुफा पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट थी। अब ये ध्यान गुफा तीर्थ यात्रियों के लिए भी खोल दी गई है।

इस गुफा में योग, ध्यान, मेडिटेशन और आध्यात्मिक शांति के लिए सभी सुविधाएं मौजूद हैं। इस गुफा का निर्माण अप्रैल में शुरू किया गया था।

यह गुफा पांच मीटर लंबी और तीन मीटर चौड़ी है। पिछले वर्ष ही साढ़े आठ लाख रुपये की लागत से इसे तैयार किया गया है।। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने रुद्र गुफा का निर्माण किया है।

गुफा को एक व्यक्ति अधिकतम तीन दिन के लिए ही बुक करा सकता है

बताते चलें कि केदारनाथ में पांच गुफाओं का निर्माण होना है। यह पहली गुफा ट्रायल के तौर पर बनाई गई है। गुफा को एक व्यक्ति अधिकतम तीन दिन के लिए ही बुक करा सकता है।

गुफा की बुकिंग में कितना खर्च आएगा, यह तय भी गढ़वाल मंडल विकास निगम ही करेगा। बदरीनाथ की गुरुड़चट्टी में साधना के बाद यह पहला मौका है

जब नरेंद्र मोदी केदारनाथ में ध्यान करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2017 में केदारनाथ में पांच योजनाओं का शिलान्यास किया था।

इन सुविधाओं से लैस है ये गुफा

इस गुफा का मुख केदारनाथ मंदिर और भैरवनाथ मंदिर की ओर है। जो विपरीत पहाड़ी की ओर स्थित हैं। इस प्राकृतिक गुफा का बाहरी हिस्सा स्थानीय पत्थरों से बना है और प्रवेश द्वार लकड़ी के दरवाजे से सुरक्षित हैं।

गुफा में बिजली और पीने का पानी जैसी कई सुविधाएं मौजूद हैं। गुफा में रुकने वाले श्रद्धालु को सुबह की चाय, नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम की चाय और रात का खाना निर्धारित समय पर दिया जाता है।

जिसे अनुरोध पर बदला जा सकता है। किसी भी आपात स्थिति में, प्रबंधक GMVN केदारनाथ से किसी भी समय फोन द्वारा मदद के लिए संपर्क किया जा सकता है।

परिचारक(अटेंडेंट) को बुलाने के लिए गुफा में एक घंटी लगी हुआ है। ध्यान गुफा से किसी भी आवश्यकता को पूरा करने के लिए कर्मचारियों की 24X7 प्रतिनियुक्ति की गई है।

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